रम, व्हिस्की और बीयर में बिना इजाजत मिलाया जा रहा था 'स्वाद',शराब कंपनियों पर FSSAI का चाबुक: अवैध फ्लेवर और उम्र के भ्रामक दावों पर थमाया नोटिस

नियमों के उल्लंघन को लेकर रेगुलेटर ने कई कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। रेगुलेटर ने कहा— 'ग्राहकों को प्रोडक्ट की असली एज बताना जरूरी'।

10 Jul 2026  |  1115

 

 

नई दिल्ली।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश में शराब (अल्कोहलिक बेवरेज) बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। नियमों के उल्लंघन को लेकर रेगुलेटर ने कई कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FSSAI का आरोप है कि कुछ कंपनियां बिना अनुमति के शराब में अतिरिक्त फ्लेवर का इस्तेमाल कर रही हैं और बोतलों पर उत्पाद की उम्र (एज) से जुड़े भ्रामक दावे कर ग्राहकों को गुमराह कर रही हैं।

प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि नियमों की अनदेखी के लिए उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

नेचुरल फ्लेवर के नाम पर नियमों का खेल

यह पूरी कार्रवाई 'खाद्य सुरक्षा एवं मानक (अल्कोहलिक बेवरेज) विनियम, 2018' के तहत की गई है। FSSAI की जांच में सामने आया है कि कुछ कंपनियां रम, ब्रांडी, जिन, व्हिस्की, वाइन और बीयर जैसे उत्पादों में प्राकृतिक स्वाद जैसा प्रभाव देने वाले फ्लेवर्स (कृत्रिम सामग्रियां) मिला रही थीं, जो कि मौजूदा नियमों के बिल्कुल खिलाफ है।

'उम्र' के दावों पर रेगुलेटर की कड़ी आपत्ति

FSSAI ने उन प्रोडक्ट्स पर विशेष रूप से आपत्ति जताई है जिन पर 'एज्ड' (Aged) यानी पुरानी शराब होने का दावा तो किया गया है, लेकिन लेबल पर सही जानकारी गायब है।

नियम क्या कहता है?

नियमों के मुताबिक, यदि कोई कंपनी शराब के पुराना होने का दावा करती है, तो उसे लेबल पर यह साफ-साफ लिखना होगा कि बताई गई उम्र ब्लेंड (मिश्रण) में इस्तेमाल की गई सबसे कम उम्र की स्पिरिट की है। रेगुलेटर का कहना है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को छुपाने से ग्राहकों को प्रोडक्ट की असली उम्र और गुणवत्ता के बारे में गलतफहमी होती है।

शराब निर्माता संगठन (CIABC) का पक्ष और 14 जुलाई की बैठक

दूसरी तरफ, शराब कंपनियों के प्रमुख संगठन 'कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज' (CIABC) ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने दावा किया कि उसके सभी सदस्य FSSAI द्वारा निर्धारित गाइडलाइंस और नियमों का सख्ती से पालन करते हैं।

हालाँकि, विभाग ने अभी तक उन कंपनियों की संख्या या नामों का खुलासा नहीं किया है जिन्हें नोटिस भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस संवेदनशील मुद्दे और विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए FSSAI ने उद्योग जगत और सभी स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के साथ 14 जुलाई को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।

सख्त लेबलिंग पर सरकार का जोर

FSSAI की यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब देश में खाद्य और पेय पदार्थों की सही लेबलिंग को लेकर जांच काफी तेज हो गई है। रेगुलेटर इस समय बाजार में मौजूद सभी तरह के फूड और बेवरेज प्रोडक्ट्स के दावों की बारीकी से स्क्रूटनी (जांच) कर रहा है, ताकि कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाई जा सके और उपभोक्ताओं के अधिकारों व स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।

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