ओवल ऑफिस की वो 'गुप्त बैठक' और टूट गया युद्धविराम; जानिए ट्रंप ने क्यों दिया ईरान पर दोबारा हमले का आदेश

हॉर्मुज में ईरानी ड्रोन और मिसाइल अटैक से भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति; तेल बिक्री पर रोक के साथ नागरिक बुनियादी ढांचों को तबाह करने की दी खुली धमकी।

10 Jul 2026  |  872

 

 

 

वॉशिंगटन/अंकारा।

अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी कूटनीतिक कोशिशों के बाद हुआ ऐतिहासिक युद्धविराम महज दो सप्ताह के भीतर ही तार-तार हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक युद्धविराम समझौते को तोड़ते हुए ईरान पर दोबारा भीषण सैन्य हमलों का आदेश दे दिया है। ट्रंप ने तेहरान पर धोखेबाज़ी और शांति समझौते के उल्लंघन का सीधा आरोप लगाया है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक खोजी रिपोर्ट में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है कि आखिर ओवल ऑफिस में ऐसा क्या हुआ, जिसने राष्ट्रपति ट्रंप को इस कड़े फैसले के लिए मजबूर किया।

अंकारा रवानगी से ठीक पहले ओवल ऑफिस में हुई सीक्रेट मीटिंग

रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार शाम को राष्ट्रपति ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्किए (अंकारा) रवाना होने वाले थे। उनके एयरफोर्स वन विमान में सवार होने से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ अचानक व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस पहुंचे।

दोनों शीर्ष अधिकारियों ने राष्ट्रपति के सामने एक बेहद संवेदनशील और नई खुफिया ब्रीफिंग रखी। इस ब्रीफिंग में बताया गया कि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमले किए हैं। कुछ ही घंटों के भीतर एक एलएनजी (LNG) टैंकर समेत तीन बड़े जहाजों को निशाना बनाया गया था।

ट्रंप का फूटा गुस्सा: "वे झूठे, धोखेबाज और बेहद खराब लोग हैं"

इस खुफिया जानकारी को सुनते ही राष्ट्रपति ट्रंप बेहद नाराज हो गए। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ गहन चर्चा के बाद तत्काल रणनीति बदलने का फैसला किया। जब तक ट्रंप का विमान अंकारा पहुंचा, तब तक व्हाइट हाउस ने समझौते से पीछे हटने और ईरान को दी गई रियायतें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

अंकारा में नाटो सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा:

"मेरे हिसाब से यह समझौता अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता। वे झूठे हैं, धोखेबाज हैं और बेहद खराब लोग हैं।"

रियायतें रद्द, दो दिन में 170 ईरानी सैन्य ठिकानों पर बमबारी

अमेरिकी आदेश के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने तुरंत ये बड़े कदम उठाए हैं:

तेल बिक्री पर रोक: व्हाइट हाउस ने अंतरिम समझौते के तहत ईरान को तेल बेचने की दी गई अनुमति को तुरंत रद्द कर दिया है।

ठिकानों पर हमले: हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने पिछले दो दिनों के भीतर ईरान के 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं।

बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की चेतावनी: ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं, तो उसके पानी साफ करने वाले संयंत्रों (वाटर प्लांट) और बिजली प्रतिष्ठानों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचों को भी तबाह कर दिया जाएगा।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दोटूक कहा है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य अभियान का दायरा और गहराई तक बढ़ाया जाएगा। वहीं मिलवॉकी में एक कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सख्त संदेश देते हुए कहा, "अगर वे जहाजों पर गोली चलाएंगे, तो हम उन्हें करारा जवाब देंगे।"

ईरान का पलटवार: "अमेरिका ने गुप्त रास्ता बनाकर किया उल्लंघन"

दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल से बात करते हुए एक ईरानी राजनयिक ने दावा किया कि अमेरिका खुद इस समझौते के उल्लंघन का दोषी है।

ईरान का आरोप है कि अमेरिकी नौसेना पिछले कई हफ्तों से ओमान के तट के साथ दक्षिणी समुद्री मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों को गोपनीय रूप से निकालने में मदद कर रही थी। इस मार्ग से 125 से अधिक जहाजों को बिना ईरान की अनुमति के निकाला गया। ये जहाज रात के समय अपना 'ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम' (AIS) बंद करके सीधे अमेरिकी नौसैनिकों के रेडियो संपर्क में थे। ईरान के अनुसार, अमेरिका ने यह एकतरफा समुद्री मार्ग बनाकर आपसी सहमति पत्र (MoU) का उल्लंघन किया था, इसलिए उन जहाजों पर ईरान की कार्रवाई पूरी तरह वैध थी।

निष्कर्ष: कूटनीति के रास्ते पर बढ़े दोनों देशों के कदम अब पूरी तरह पीछे खिंच चुके हैं और खाड़ी क्षेत्र एक बार फिर बड़े युद्ध की कगार पर खड़ा दिखाई दे रहा है।

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