मध्य प्रदेश : 434 साल बाद खुला इतिहास का खजाना! पन्ना के मंदिर में मिली पुरानी 'रसिकप्रिया', दुर्लभ पत्र और सैकड़ों प्राचीन पांडुलिपियां भी आईं सामने

इतिहास के पन्नों से निकली अमूल्य धरोहर: पन्ना के मंदिर में मिली महाकवि केशवदास की 435 वर्ष पुरानी 'रसिकप्रिया',अब होगा डिजिटाइजेशन।

10 Jul 2026  |  1139

 

 

पन्ना (मध्य प्रदेश)।

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में चल रहे 'ज्ञान भारतम् अभियान' के तहत भारतीय इतिहास, संस्कृति और हिंदी साहित्य से जुड़ी एक ऐसी अभूतपूर्व खोज सामने आई है, जिसने देश के विद्वानों और शोधकर्ताओं को रोमांचित कर दिया है। जिले के ऐतिहासिक श्री राम-जानकी मंदिर से रीतिकाल के प्रवर्तक व महाकवि आचार्य केशवदास द्वारा वर्ष 1591 ईस्वी में रचित प्रसिद्ध ग्रंथ 'रसिकप्रिया' की अत्यंत दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि (Manuscript) प्राप्त हुई है।

चार सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी इस साहित्यिक धरोहर का सुरक्षित मिलना हिंदी जगत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए एक युगांतकारी उपलब्धि माना जा रहा है।

1591 की 'रसिकप्रिया': साहित्य जगत की सबसे बड़ी खोज

आचार्य केशवदास ओड़छा नरेश के दरबारी कवि थे और उनकी रचना 'रसिकप्रिया' को हिंदी साहित्य के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है। इस कालजयी कृति में श्रृंगार रस, नायिका-भेद और काव्य शास्त्रीय सौंदर्य का अद्भुत व विस्तृत वर्णन मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हस्तलिखित प्रति के मिलने से आचार्य केशवदास के मूल लेखन और उस दौर की ब्रजभाषा के स्वरूप को समझने में नई मदद मिलेगी।

जिले के 64 स्थानों से मिला प्राचीन ज्ञान का खजाना

'ज्ञान भारतम् अभियान' के तहत पन्ना जिले के विभिन्न घरों, प्राचीन मंदिरों और निजी संग्रहों में एक व्यापक खोज अभियान चलाया गया था। इस दौरान हैरान कर देने वाले परिणाम सामने आए हैं:

सैकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियां: जिले के 64 अलग-अलग स्थानों से करीब 300 से 400 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज बरामद हुए हैं।

220 साल पुरानी श्रीमद्भागवत: खोज में लगभग 220 वर्ष पुरानी श्रीमद्भागवत महापुराण की हस्तलिखित प्रति और एक प्राचीन विश्व मानचित्र (World Map) भी मिला है।

धार्मिक ग्रंथों का भंडार: इसके अलावा प्रणामी संप्रदाय, जैन समुदाय और सनातन परंपरा से जुड़े भगवद्गीता व अन्य पुराणों के कई महत्वपूर्ण हस्तलिखित ग्रंथ भी सामने आए हैं।

बाजीराव पेशवा से जुड़ा ऐतिहासिक पत्र भी बरामद

इस अभियान की एक और बड़ी कूटनीतिक और ऐतिहासिक सफलता पन्ना के एक शास्त्री परिवार के निजी संग्रह से मिली है। यहाँ से वर्ष 1915 का बाजीराव पेशवा से जुड़ा एक हस्तलिखित पत्र और दस्तावेज प्राप्त हुआ है। इतिहासकारों का मानना है कि यह दुर्लभ पत्र उस दौर के सामाजिक, राजनैतिक और प्रशासनिक ताने-बाने तथा बुंदेलखंड व मराठों के संबंधों को समझने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होगा।

संरक्षण के लिए बनी 5 सदस्यीय समिति; अब होगा डिजिटाइजेशन

पन्ना में मिली इस अमूल्य विरासत को समय की धूल से बचाने और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए हैं। पन्ना कलेक्टर ने इन दुर्लभ पांडुलिपियों के वैज्ञानिक संरक्षण और संपूर्ण डिजिटाइजेशन के लिए एक पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

डिजिटल रिकॉर्ड से शोध को नई उड़ान:

यह समिति सभी प्राप्त पांडुलिपियों को वैज्ञानिक तरीके से सहेजने के साथ-साथ उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी। इससे न केवल आने वाली पीढ़ियां अपनी समृद्ध विरासत को देख सकेंगी, बल्कि देश-विदेश के शोधकर्ताओं (Researchers) को भी इन प्राचीन दस्तावेजों पर अध्ययन करने के लिए घर बैठे एक्सेस मिल सकेगा।

निष्कर्ष: पन्ना में हुई यह ऐतिहासिक खोज साबित करती है कि भारत के सुदूर अंचलों में आज भी प्राचीन ज्ञान और इतिहास का कितना बड़ा खजाना छुपा हुआ है। 'रसिकप्रिया' की यह खोज पन्ना की ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक पटल पर एक नई और गौरवशाली पहचान दिलाएगी।

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