‘सिद्धिविनायक को धोखे और उधर खोके’... हाथ में सबूतों की फाइल लहराकर एकनाथ शिंदे ने उड़ाई उद्धव गुट के ‘असली हिंदुत्व’ की धज्जियां

सदन में सियासी भूचाल: ‘राम मंदिर पर उंगली उठाने वालों ने बप्पा की दानपेटी तक को नहीं बख्शा’, विधानसभा में शिंदे का महापलटवार

10 Jul 2026  |  786

 

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में उस समय भारी राजनीतिक भूचाल आ गया, जब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने सदन के पटल से हिंदुत्व और आस्था के नाम पर अब तक का सबसे आक्रामक पलटवार कर दिया। अयोध्या के राम मंदिर निर्माण में कथित भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं के बहाने सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे उद्धव गुट को शिंदे ने ऐसा आईना दिखाया कि पूरा विपक्ष सन्न रह गया। हाथों में सबूतों की फाइल लहराते हुए डिप्टी सीएम ने सीधे आरोप लगाया कि जो लोग आज राम मंदिर पर उंगली उठा रहे हैं, उनके साथियों ने मुंबई के सुप्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी तक को नहीं बख्शा था। इस तीखे हमले ने महाराष्ट्र की सियासत में ‘असली बनाम नकली हिंदुत्व’ की जंग को एक बेहद आक्रामक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।

राम मंदिर पर वार... शिंदे का करारा पलटवार

दरअसल, बीते दिन उद्धव गुट के नेताओं ने अयोध्या राम मंदिर में पानी टपकने और कथित अव्यवस्थाओं को लेकर महायुति सरकार और बीजेपी पर तीखे बाण चलाए थे। इस पर पलटवार करते हुए आज एकनाथ शिंदे ने सदन में साफ किया,

"अयोध्या में जो कुछ भी हुआ, उसका कोई भी समर्थन नहीं कर सकता। राम भक्तों की वेदना से सरकार भली-भांति वाकिफ है। लेकिन यह मोदी जी और योगी जी का राज है, यहाँ कोई भी गुनहगार छूटेगा नहीं, उन्हें जेल में चक्की पीसने और पत्थर तोड़ने के लिए भेजा जाएगा।"

इसके तुरंत बाद शिंदे ने अपने तेवर और कड़े करते हुए इतिहास का वो पन्ना पलट दिया जिसके लिए विपक्ष बिल्कुल तैयार नहीं था।

‘सिद्धिविनायक को धोखे और उधर खोके...’

डिप्टी सीएम ने सदन के भीतर पुरानी खबरों की कतरनें (न्यूज कटिंग्स) हवा में लहराते हुए सीधे सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कुप्रबंधन का मुद्दा उठाया। उन्होंने बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे और उनके गुट को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब इनके साथियों ने बप्पा की दानपेटी लूटने का महापाप किया था, तब तत्कालीन सरकार मूकदर्शक बनकर क्यों बैठी रही? जांच के आदेश क्यों नहीं दिए गए?

शिंदे ने मीडिया रिपोर्ट्स की हेडलाइन पढ़ते हुए कहा कि इसमें साफ लिखा है— ‘सिद्धिविनायक को धोखे और उधर खोके’। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आरोप उनके मनगढ़ंत नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता नितिन किलेदार ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस पूरे घोटाले और वस्तुस्थिति को जनता के सामने रखा था।

“क्या यह है तुम्हारा हिंदुत्व?”: शिंदे ने दागे 5 तीखे सवाल

अपने भाषण के आखिरी हिस्से में शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों की याद दिलाते हुए उद्धव गुट की दुखती रग पर हाथ रख दिया और सवालों की झड़ी लगा दी:

बप्पा के खजाने पर डाका: "सिद्धिविनायक की दान पेटी पर डाका डालना, क्या यह हमारा हिंदुत्व है?"

सावरकर का अपमान: "सावरकर को 'माफीवीर' कहने वाले कांग्रेसी नेताओं की गोदी में जाकर बैठना, क्या यह हमारा हिंदुत्व है?"

विचारधारा से समझौता: "वोट बैंक की राजनीति के लिए वंदनीय बालासाहेब के प्रखर विचारों को तोड़ना-मरोड़ना, क्या यह हमारा हिंदुत्व है?"

साधुओं की हत्या पर चुप्पी: "पालघर में निर्दोष साधुओं की बेरहमी से हत्या होने पर मुंह में दही जमाकर बैठे रहना, क्या यह हमारा हिंदुत्व है?"

तुष्टिकरण की राजनीति: "सिर्फ वोटों की खातिर आतंकवादियों के समर्थकों को अपनी चुनाव प्रचार सभाओं में घुमाना और चुनाव में पाकिस्तान के झंडे लहराने पर चुप रहना, क्या यह हमारा हिंदुत्व है?"

चुनावी रण की नई पटकथा

एकनाथ शिंदे के इन तीखे और सीधे सवालों ने न सिर्फ सदन का तापमान बढ़ा दिया, बल्कि विपक्ष के पास इसका कोई जवाब नहीं था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में हुए इस घमासान ने यह साफ कर दिया है कि आगामी चुनावों में 'हिंदुत्व और आस्था के साथ धोखा' ही महायुति का सबसे बड़ा और धारदार चुनावी हथियार बनने जा रहा है।

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