वंदे मातरम के 150वें साल पर केंद्र के नए नियम: राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के लिए MHA ने जारी की गाइडलाइन, जारी हुआ सख्त प्रोटोकॉल

मातृभूमि के सम्मान में मर्यादा का पालन जरूरी; 'जन गण मन' के बराबर दर्जे वाले 'वंदे मातरम' को गाने के लिए MHA ने तय किए कड़े नियम, 3 मिनट 10 सेकंड का होगा आधिकारिक गायन।

11 Jul 2026  |  854

 

नई दिल्ली। स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक चेतना और भारत के गौरव का प्रतीक 'वंदे मातरम' गीत अपने 150वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस ऐतिहासिक अवसर को मनाते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश के राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को लेकर एक नया और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालयों और राजभवनों को भेजे गए इस आधिकारिक निर्देश में दोनों राष्ट्रीय प्रतीकों को गाने और बजाने से जुड़े नियमों व प्रोटोकॉल को पूरी तरह स्पष्ट किया गया है।

मुख्य बातें :

बराबर सम्मान: 'वंदे मातरम' (राष्ट्रगीत) को 'जन गण मन' (राष्ट्रगान) के बराबर का दर्जा और सम्मान प्राप्त है।

पहला स्थान: किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम में यदि राज्य गीत, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान तीनों होने हैं, तो सबसे पहले राष्ट्रगीत गाया/बजाया जाएगा, उसके बाद राष्ट्रगान।

अवधि और छंद: आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के 6 छंद गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी।

 किन मौकों पर गाया/बजाया जाएगा राष्ट्रगीत?

गृह मंत्रालय के नए आदेश के अनुसार, राष्ट्रगीत को निम्नलिखित आधिकारिक अवसरों पर अनिवार्य रूप से गाया या बजाया जाएगा:

राष्ट्रपति के कार्यक्रम: नागरिक सम्मान समारोहों में, राष्ट्रपति के औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में उनके आगमन (आने) और प्रस्थान (जाने) के समय।

राष्ट्रपति का संबोधन: राष्ट्रपति द्वारा ऑल इंडिया रेडियो (AIR) और टेलीविज़न पर देश को संबोधित करने से ठीक पहले और ठीक बाद में।

गवर्नर और एलजी के कार्यक्रम: राज्यपालों (Governors) और उप-राज्यपालों (LG) के अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाले औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में उनके आने और जाने के समय।

परेड: सैन्य या आधिकारिक परेड के दौरान जब राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) लाया जाए।

विशेष अवसर: भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले विशेष आदेशों के तहत अन्य अवसरों पर।

 राष्ट्रगीत गाने का प्रोटोकॉल (नियम)

मंत्रालय ने राष्ट्रगीत गाते समय गरिमा बनाए रखने के लिए कुछ कड़े नियम तय किए हैं:

सावधान की मुद्रा: जिस भी सभा या कार्यक्रम में राष्ट्रगीत गाया जाएगा, वहाँ उपस्थित सभी लोग सावधान (Attention) की मुद्रा में सीधे खड़े होंगे।

शब्द और उच्चारण: राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को गाते या बजाते समय उनके सही शब्दों, सटीक उच्चारण और बोलने के तरीके का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। इसके लिए सही शब्द और उच्चारण गाइड MHA की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।

सामूहिक गायन की छूट: उन सभी मौकों की सूची देना संभव नहीं है जहाँ इसे गाया जा सकता है, लेकिन यदि मातृभूमि के सम्मान में पूरी मर्यादा और गरिमा के साथ इसे सामूहिक रूप से गाया जाए, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है।

 राज्य गीत, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का क्रम

कुछ राज्यों के अपने आधिकारिक 'राज्य गीत' (State Songs) भी होते हैं। गृह मंत्रालय ने इनके गायन का क्रम पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है:

क्रम (Sequence)क्या गाया/बजाया जाएगा?
1. पहला स्थानराष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम)
2. दूसरा स्थानराष्ट्रगान (जन गण मन)

 

नोट: जब भी किसी कार्यक्रम में राज्य गीत शामिल होगा, तब भी राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को एक साथ गाया/बजाया जाएगा और ऊपर दिए गए क्रम (पहले राष्ट्रगीत, फिर राष्ट्रगान) का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

सावधान की मुद्रा अनिवार्य; 6 छंद और 3 मिनट 10 सेकंड का नियम

मंत्रालय द्वारा जारी प्रोटोकॉल के अनुसार, राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन के लिए समय-सीमा और आचरण तय कर दिया गया है।

सावधान की मुद्रा: आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिस भी सभा या कार्यक्रम में राष्ट्रगीत गाया जाएगा, वहां उपस्थित सभी नागरिकों को अनिवार्य रूप से सावधान (Attention) की मुद्रा में खड़ा होना होगा।

अवधि: आधिकारिक कार्यक्रमों (जैसे राष्ट्रपति का आगमन, तिरंगा फहराना और राज्यपालों के भाषण) में इसके छह छंद गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है।

कार्यक्रमों में अब यह होगा गायन का क्रम

गृह मंत्रालय ने कुछ राज्यों में 'राज्य गीत' (State Song) के साथ होने वाले असमंजस को दूर करते हुए पदानुक्रम तय कर दिया है। नए नियमों के अनुसार:

जब भी किसी कार्यक्रम में राज्य गीत को राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रगान के साथ गाया जाएगा, तो राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों एक साथ गाए/बजाए जाएंगे।

इस क्रम में सबसे पहले राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) गाया या बजाया जाएगा और उसके ठीक बाद राष्ट्रगान (जन गण मन) की प्रस्तुति होगी।

सामूहिक गायन पर कोई आपत्ति नहीं: मंत्रालय ने साफ किया है कि उन सभी मौकों की पूरी सूची देना संभव नहीं है जिन पर राष्ट्रगीत के आधिकारिक संस्करण को गाने की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन, यदि देश का कोई भी नागरिक या समूह मातृभूमि के सम्मान में, उचित मर्यादा और पूर्ण गरिमा के साथ इसे सामूहिक रूप से गाता है, तो इसमें किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं है।

इन आधिकारिक मौकों पर बजाना/गाना होगा अनिवार्य

9 जुलाई को जारी ताजा आदेश के तहत राष्ट्रीय गीत को निम्नलिखित विशेष अवसरों पर अनिवार्य रूप से गाया और बजाया जाएगा:

शीर्ष संवैधानिक पदों के कार्यक्रम: नागरिक सम्मान समारोहों और राष्ट्रपति के औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में उनके आगमन (आने) और प्रस्थान (जाने) के समय।

देश के नाम संबोधन: राष्ट्रपति द्वारा ऑल इंडिया रेडियो (AIR) और दूरदर्शन/टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित करने से ठीक पहले और ठीक बाद में।

राजभवनों के आयोजन: राज्यपालों (Governors) और उप-राज्यपालों (LG) के राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाले औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में उनके आने और जाने के वक्त।

राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान: आधिकारिक सैन्य या राष्ट्रीय परेड में जब राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) मंच के सामने लाया जाएगा। इसके अलावा भारत सरकार के विशेष आदेशों पर भी इसे अन्य अवसरों पर बजाया जा सकेगा।

'जन गण मन' के बराबर ही है 'वंदे मातरम' का दर्जा

गृह मंत्रालय ने ऐतिहासिक तथ्यों को दोहराते हुए याद दिलाया कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव में 'जन गण मन' को राष्ट्रगान घोषित किया गया था। ठीक उसी समय यह भी सर्वसम्मति से तय किया गया था कि भारत की आज़ादी की लड़ाई में क्रांतिकारी भूमिका निभाने वाले अमर गीत ‘वंदे मातरम’ को भी ‘जन गण मन’ के बिल्कुल बराबर का सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।

मंत्रालय ने आम जनता और अधिकारियों की सुविधा के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान के सही शब्दों और शुद्ध उच्चारण की एक विस्तृत गाइडलाइन भी उपलब्ध करा दी है।

 'वंदे मातरम' का ऐतिहासिक महत्व

संविधान सभा का संकल्प: 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव के तहत 'जन गण मन' को भारत का राष्ट्रगान घोषित किया गया था।

समान दर्जा: इसी संकल्प में यह भी साफ किया गया था कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले गीत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान (जन गण मन) के बराबर ही सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।

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