बुनिया (कांगो)।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में पैर पसार रहा इबोला वायरस अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कांगो में इबोला का वास्तविक प्रकोप आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में दो से चार गुना अधिक भयावह हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस प्रकोप के केंद्र में हर पांच में से चार नए मामलों (80%) के संक्रमण का स्रोत पूरी तरह अज्ञात है, यानी इनका पहले से संक्रमित किसी भी मरीज से कोई ज्ञात संबंध नहीं मिल रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्वास्थ्य कर्मी इस जानलेवा बीमारी को रोकने के लिए अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कांगो में यह वायरस अब तक 1,792 लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है, जबकि 625 लोगों की इससे मौत हो चुकी है।
इतुरी प्रांत बना महामारी का नया केंद्र, 15 KM तक फैला खौफ
WHO के आपात स्थिति निदेशक चिकवे इहेक्वेजू ने एक साक्षात्कार में बताया कि प्रकोप के मुख्य केंद्र इतुरी प्रांत की राजधानी बुनिया में स्थिति सबसे गंभीर है। यहाँ 80 प्रतिशत नए पुष्ट मरीज स्वास्थ्य विभाग की 'कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग' (संपर्क सूचियों) के बाहर से आ रहे हैं। इतुरी की 10 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में इबोला के लिए टेस्ट किए जाने वाले हर दो में से एक मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है, जो सघन और निरंतर सामुदायिक संक्रमण (कम्युनिटी स्प्रेड) का स्पष्ट प्रमाण है।
राहत की बात सिर्फ इतनी है कि कम मामलों वाले क्षेत्रों, जैसे उत्तरी किवु प्रांत में लगभग सभी नए मामले पुरानी संपर्क सूचियों से ही आ रहे हैं, जो वहां मामूली प्रगति को दर्शाता है।
वायरस फैलने के मुख्य कारण और चुनौतियां
हल्के लक्षणों के कारण इलाज में देरी: शुरुआती जांच से पता चला है कि इबोला वायरस का 'बुंडीबुग्यो स्ट्रेन' अन्य प्रकारों की तुलना में हल्के लक्षण पैदा कर रहा है। इसके कारण स्थानीय लोगों में बीमारी का डर कम हो गया है। लोग अस्पताल जाने के बजाय बीमार रिश्तेदारों की घर पर ही देखभाल कर रहे हैं।
समुदाय के बीच बढ़ता खतरा: हल्के लक्षणों के कारण संक्रमित लोग लंबे समय तक समुदाय के बीच खुलेआम घूम रहे हैं और अनजाने में वायरस फैला रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, मरीज उम्मीद से कहीं अधिक समय तक उचित देखभाल से दूर रह रहे हैं।
उपचार केंद्रों के बाहर 70% मौतें: समुदाय में होने वाली मौतें प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गई हैं। इस प्रकोप में हुई पहली 400 मौतों के विश्लेषण से सामने आया है कि लगभग 70% मौतें उपचार केंद्रों के बाहर यानी घरों या रास्तों में हुईं।
केंद्र से बाहर निकलकर नए प्रांतों में दी दस्तक
वर्तमान में इबोला के लगभग 90% मामले अकेले इतुरी प्रांत के बुनिया, रम्पारा, मोंगबवालु और न्याकुंडे क्षेत्रों में केंद्रित हैं। हालांकि, संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज है कि यह वायरस अब अपने मुख्य केंद्र से आगे बढ़कर उत्तरी किवु, दक्षिणी किवु और हाल ही में त्शोपो प्रांत तक भी फैल गया है, जिससे पूरे देश में हाई अलर्ट की स्थिति है।
निगरानी बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती, 21 हजार कर्मी मैदान में
निदेशक चिकवे इहेक्वेजू ने स्पष्ट किया कि इस समय ग्राउंड लेवल पर सर्विलांस (निगरानी प्रणाली) को मजबूत करना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। महामारी की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए अधिकारियों ने इसी सप्ताह से एक विशाल अभियान शुरू किया है। इसके तहत 21,000 सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देकर मैदान में उतारा गया है। ये कर्मी अब घर-घर जाकर जांच करेंगे, संदिग्ध मामलों की पहचान करेंगे और लक्षण वाले लोगों को तुरंत उपचार केंद्रों तक पहुंचाने का काम करेंगे।