दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा 'कर्ज का दलदल' बना बांग्लादेश: यूक्रेन के बाद सबसे ज्यादा डूबा बैंकों का पैसा, बैंकिंग सिस्टम वेंटिलेटर पर

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था; बैंकों का 61% पैसा अधर में लटका, अफ्रीकी देशों चाड और गिनी से भी बदतर हुए हालात।

11 Jul 2026  |  890

 

 

ढाका। पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक और वित्तीय संकट से गुजर रहा है। एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश का पूरा बैंकिंग सिस्टम ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच गया है। देश के बैंकों द्वारा बांटे गए कुल कर्ज का लगभग एक-तिहाई हिस्सा (32.26%) पूरी तरह डूब चुका है और नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) में तब्दील हो गया है।

इस डरावने आंकड़े के साथ बांग्लादेश अब दुनिया में सबसे ज्यादा डूबे कर्ज (37.35%) वाले युद्धग्रस्त देश यूक्रेन के बाद विश्व में दूसरे नंबर पर आ गया है। दक्षिण एशियाई देशों (सार्क) में भी बांग्लादेश की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हो चुकी है।

₹4.54 लाख करोड़ डूबे, अफ्रीका के चाड-गिनी से भी बदतर स्थिति

बांग्लादेश बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक देश का डूबा हुआ कर्ज बढ़कर 5.89 लाख करोड़ टका (लगभग ₹4.54 लाख करोड़) के पार पहुंच गया है। चिंता की बात यह है कि इसमें से 31,000 करोड़ टका तो सिर्फ पिछले तीन महीनों में डूबा है। बांग्लादेश की हालत इस समय गृहयुद्ध और कंगाली झेल रहे अफ्रीकी देश चाड (31.51%) और गिनी (31.15%) से भी बदतर हो गई है।

नेताओं की यारी और 'क्रोनी कैपिटलिज्म' ने डुबोई लुटिया

बांग्लादेश के प्रतिष्ठित अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस महासंकट के पीछे कमजोर वित्तीय नियम और राजनीतिक रसूख सबसे बड़ी वजह रहे हैं।

सिफारिशी लोन: बैंकों ने लोन बांटते समय कर्जदारों की योग्यता या रीपेमेंट क्षमता देखने के बजाय राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को तरजीह दी।

61% पैसा अधर में: नेताओं और रसूखदारों की सिफारिश पर बांटे गए इन अंधाधुंध कर्जों ने पूरे सिस्टम का बेड़ा गर्क कर दिया। देश का कुल बकाया ऋण 18.25 लाख करोड़ टका है, लेकिन अगर स्पेशल कैटेगरीज के संकटग्रस्त लोन को भी जोड़ लिया जाए, तो बांग्लादेश के बैंकों का 61 प्रतिशत पैसा अधर में लटका हुआ है।

पाताल में पहुंचा पैमाना; भारत-पाकिस्तान बेहद मजबूत

बैंकों की वित्तीय सेहत नापने वाले सबसे महत्वपूर्ण पैमाने यानी 'कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो' (CRAR) के मामले में बांग्लादेश पाताल में चला गया है। यह घटकर माइनस 2.64% (-2.64%) हो गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक इसे कम से कम 12.5% होना चाहिए।

इसके उलट, वित्तीय अनुशासन के मामले में पड़ोसी देशों ने खुद को सुरक्षित रखा है। CRAR के मामले में पाकिस्तान 20.8%, श्रीलंका 19.4% और भारत 17.2% के साथ बेहद मजबूत और सुरक्षित स्थिति में बने हुए हैं।

नया लोन देने के लिए पैसे नहीं: एनआरबीसी (NRBC) बैंक के एमडी और सीईओ तौहीदुल आलम खान का कहना है कि क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जब बैंकों का इतना बड़ा पैसा डूब जाता है, तो अदालती मुकदमों का खर्च बढ़ता है और मुनाफा खत्म हो जाता है। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि बैंकों के पास फैक्ट्रियों, बिजनेस और आम जनता को नया लोन देने के लिए पैसे ही नहीं बचते, जिससे देश की आर्थिक विकास दर थम जाती है।

105 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज, बजट पर भारी 'ब्याज'

जाने-माने अर्थशास्त्री मुस्तफिजुर रहमान ने बताया कि पहले बांग्लादेश के बजट में वेतन और पेंशन के बाद शिक्षा और कृषि जैसे लोक-कल्याणकारी क्षेत्र प्रमुख खर्च हुआ करते थे, लेकिन अब उनकी जगह 'कर्ज भुगतान' (Loan Repayment) ने ले ली है।

विश्व बैंक की ‘अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट 2025’ के मुताबिक, बांग्लादेश का बाहरी कर्ज पिछले पांच वर्षों में 42 प्रतिशत बढ़कर करीब 105 अरब डॉलर हो चुका है। यह कर्ज अब देश की कुल निर्यात आय के मुकाबले 192 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। वहीं देश का डेट-टू-जीडीपी (Debt-to-GDP) अनुपात भी बढ़कर 39 प्रतिशत के पार जा चुका है, जो वित्त वर्ष 2017-18 में महज 34 प्रतिशत था। साफ है कि यदि तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो बांग्लादेश को इस वित्तीय दलदल से निकालना असंभव हो जाएगा।

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