गया/पटना।
बिहार के गया स्थित 'बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान' (बिपार्ड) परिसर में शनिवार को बिहार विधानसभा के सभी विधायकों के लिए दो दिवसीय आवासीय प्रबोधन (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का शानदार आगाज हुआ। इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि भारत के उपराष्ट्रपति के साथ-साथ बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और बिहार विधानसभा अध्यक्ष सहित अन्य गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
11 और 12 जुलाई को आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विशेष रूप से नवनिर्वाचित और पहली बार चुनाव जीतकर आए विधायकों को आमंत्रित किया गया है, ताकि उन्हें विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय परंपराओं से रूबरू कराया जा सके।
क्यों जरूरी है माननीयों के लिए यह 'क्लास'?
उद्घाटन सत्र के दौरान तमाम नीति-निर्माताओं और वक्ताओं ने जनप्रतिनिधियों के लिए ज्ञान, अध्ययन और निरंतर प्रशिक्षण के महत्व पर विशेष जोर दिया।
जिम्मेदारियों का अहसास: वक्ताओं ने कहा कि कई विधायक पहली बार सदन पहुंचे हैं, वहीं कुछ को सरकार में नई और बड़ी जिम्मेदारियां मिली हैं। ऐसे में विधानसभा के भीतर जनता की आवाज को प्रभावी और तार्किक तरीके से उठाने के लिए विधायी नियमों की बारीक समझ होना बेहद जरूरी है।
जनता और सरकार के बीच की कड़ी: विधायक अपने क्षेत्र की जनता और सरकार के बीच सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। विधायी प्रक्रियाओं की बेहतर समझ से वे सदन में तथ्यात्मक रूप से अपनी बात रख सकेंगे, जिससे न सिर्फ जनहित के मुद्दों का त्वरित समाधान होगा बल्कि सदन में सार्थक चर्चा को भी बढ़ावा मिलेगा।
इन मुख्य विषयों पर विशेषज्ञों से मिलेगा मार्गदर्शन
दो दिवसीय आवासीय प्रबोधन कार्यक्रम के दौरान देश के जाने-माने विशेषज्ञ, अनुभवी राजनेता और अधिकारी अलग-अलग सत्रों में विधायकों को निम्नलिखित विषयों पर ट्रेनिंग देंगे:
संसदीय कार्यप्रणाली और मर्यादा: सदन के भीतर चर्चा के दौरान किस तरह से संसदीय मर्यादा, अनुशासन और गरिमा का पालन किया जाए।
विधायी प्रक्रिया और विधेयकों पर चर्चा: विधानसभा में कानून या विधेयक (Bills) कैसे बनते हैं, उन पर बहस में कैसे हिस्सा लिया जाए।
संसदीय टूल्स का प्रभावी उपयोग: प्रश्नकाल (Question Hour), शून्यकाल (Zero Hour) और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के जरिए अपने क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से कैसे उठाएं।
ई-विधानसभा और डिजिटल साक्षरता: बदलते दौर में तकनीक के इस्तेमाल और ई-विधानसभा (E-Vidhan) के संचालन को समझना।
अनुभवी नेताओं के अनुभवों से सीखने का बड़ा मौका
आयोजकों के मुताबिक, यह कार्यक्रम विधायकों की विधायी क्षमता को मजबूत करने और उनकी कार्यशैली को निखारने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण पहल है। इसके जरिए युवा और नए विधायकों को अपने वरिष्ठ व अनुभवी जनप्रतिनिधियों के राजनीतिक अनुभवों से बहुत कुछ सीखने और समझने का सीधा अवसर मिलेगा।
प्रबोधन कार्यक्रम के दूसरे दिन यानी रविवार (12 जुलाई) को भी विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सुशासन (Good Governance), विधायी जवाबदेही और संसदीय दायित्वों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।