भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का एक परिपक्व और अनुशासित चेहरा सामने आया है। उपचुनाव में टिकट न मिलने की चर्चाओं के बाद भोपाल पहुंचे डॉ. मिश्रा ने तमाम सियासी अटकलों पर पूर्णविराम लगाते हुए पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी अटूट निष्ठा दोहराई है।
"कार्यकर्ता धैर्य रखें, अनुशासन सर्वोपरि"
भोपाल आगमन पर समर्थकों की भारी भीड़ के बीच डॉ. मिश्रा ने बेहद संयमित लहजे में कहा, "कार्यकर्ता मेरे अपने हैं, लेकिन उन्हें धैर्य और संयम का परिचय देना चाहिए। कोई भी बात यदि कहनी हो, तो वह पार्टी के निर्धारित फोरम और तय प्रक्रिया के अनुसार ही रखी जानी चाहिए।" उन्होंने विश्वास जताया कि उनके सभी समर्पित कार्यकर्ता पार्टी की गरिमा और अनुशासन का पालन करेंगे।
"मुस्कुराहट के साथ नकारी नाराजगी"
जब उनसे पूछा गया कि टिकट कटने की जानकारी उन्हें कब मिली, तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मुस्कुराते हुए सहज भाव से उत्तर दिया, "जब आपको पता चला, तब मुझे भी पता चला।" नाराजगी के सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा, "पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, मैं उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। मेरी किसी से कोई नाराजगी नहीं है।"
पार्टी प्रत्याशी को पूर्ण समर्थन
सियासी गलियारों में चल रहे 'बवाल' के विपरीत डॉ. मिश्रा ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को दतिया जाना चाहिए और चुनाव प्रचार में जुट जाना चाहिए। नामांकन में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया, "मैं निश्चित रूप से नामांकन प्रक्रिया में शामिल होऊंगा और पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करूंगा।"
सियासी जानकारों की नजर में: डॉ. नरोत्तम मिश्रा का यह कदम न केवल एक अनुभवी राजनेता के धैर्य को दर्शाता है, बल्कि भाजपा के भीतर 'पार्टी सर्वोपरि' की संस्कृति को भी मजबूती देता है। उनके इस रुख ने दतिया के उपचुनाव में पार्टी को एकजुट करने का बड़ा संदेश दिया है।