'कुर्सी' छीनने वाला ऐतिहासिक कानून: 30 दिन जेल में रहे तो खुद-ब-खुद चला जाएगा PM, CM और मंत्रियों का पद, JPC की ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार

130वें संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की 5 बड़ी सिफारिशें; सांसद-विधायक की सदस्यता रहेगी सुरक्षित, सिर्फ कार्यकारी पद पर गिरेगी गाज।

12 Jul 2026  |  778

 

 

नई दिल्ली। देश की राजनीति और शासन व्यवस्था को शुचिता प्रदान करने के उद्देश्य से संसद में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कानून बनाने की तैयारी चल रही है। 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने गहन जांच और विचार-विमर्श के बाद अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस विधेयक को राजनीतिक गलियारों में 'सीएम और मंत्रियों की कुर्सी छीनने वाला विधेयक' भी कहा जा रहा है। विपक्ष के भारी विरोध के बाद इसे जेपीसी को भेजा गया था, जिसने अब अपनी 5 मुख्य सिफारिशों के साथ खाका तैयार कर लिया है।

जेपीसी (JPC) की ड्राफ्ट रिपोर्ट की 5 मुख्य सिफारिशें:

1. 30 दिन जेल में रहने पर मंत्रियों की विदाई तय

समिति की पहली सिफारिश के अनुसार, यदि कोई केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री या केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली/जम्मू-कश्मीर/पुडुचेरी) का मंत्री किसी गंभीर अपराध (जिसमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो) में गिरफ्तार होता है और लगातार 30 दिनों तक जेल में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा। 31वें दिन तक प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को संबंधित राज्यपाल या राष्ट्रपति को उसे हटाने की सलाह देनी होगी। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो 31वें दिन मंत्री का पद खुद-ब-खुद समाप्त माना जाएगा।

2. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों पर भी लागू होगा नियम

यह कानून केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके दायरे में खुद प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री भी आएंगे। यदि पीएम या कोई सीएम 5 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले मामले में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन तक अनिवार्य रूप से इस्तीफा देना होगा। इस्तीफा न देने की स्थिति में वे स्वतः ही अपने पद से मुक्त माने जाएंगे।

3. सांसद या विधायक की सदस्यता पर आंच नहीं

इस संशोधन की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत संबंधित नेताओं की सांसद या विधायक के रूप में सदस्यता रद्द नहीं होगी। उन्हें केवल उनके कार्यकारी पदों (PM, CM या मंत्री) से हटाया जाएगा। जब तक मौजूदा कानूनों (जैसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम) के तहत वे अयोग्य नहीं ठहराए जाते, तब तक वे निर्वाचित जनप्रतिनिधि बने रहेंगे।

4. रिहाई के बाद पुनर्नियुक्ति का विकल्प

यदि कोई नेता न्यायिक हिरासत से रिहा हो जाता है, तो संवैधानिक प्रावधानों और नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी (राष्ट्रपति/राज्यपाल) के विवेक के आधार पर उसे दोबारा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा।

5. इन अनुच्छेदो और अधिनियमों में होगा बदलाव

समिति ने इस व्यवस्था को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए संविधान के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है:

अनुच्छेद 75: केंद्रीय मंत्रिपरिषद से संबंधित

अनुच्छेद 164: राज्य मंत्रिपरिषद से संबंधित

अनुच्छेद 239AA: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से संबंधित

अधिनियमों में बदलाव: जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम (2019) और केंद्र शासित प्रदेश शासन अधिनियम (1963 - पुडुचेरी) में भी संशोधन किया जाएगा।

संघीय ढांचे और बुनियादी सिद्धांतों से कोई छेड़छाड़ नहीं

जेपीसी ने अपनी सिफारिशों में स्पष्ट किया है कि यह संशोधन आपराधिक कानून या 'दोष सिद्ध होने तक निर्दोष' माने जाने के न्यायशास्त्रीय सिद्धांत को प्रभावित नहीं करता है। साथ ही, यह सांसदों-विधायकों की अयोग्यता से जुड़े अनुच्छेद 102 और 191 में कोई बदलाव नहीं करता। चूंकि मंत्रियों को हटाने की प्रक्रिया पीएम या सीएम की सलाह पर ही शुरू होगी, इसलिए यह देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) को भी चोट नहीं पहुंचाता है।

मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक

सूत्रों के मुताबिक, जेपीसी अगले हफ्ते अपनी फाइनल रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को सौंपने जा रही है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में इस बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले विधेयक को पारित कराने के लिए पटल पर रख सकती है। यदि यह कानून बनता है, तो भारतीय राजनीति के इतिहास में जेल से सरकार चलाने के दौर पर पूरी तरह विराम लग जाएगा।

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