रेगिस्तान में अमेरिकी युद्धपोत पर ड्रैगन का निशाना: सैटेलाइट तस्वीरों से चीन की बड़ी सैन्य चालबाजी का खुलासा

शिनजियांग के रेगिस्तान में चीन ने बनाया अमेरिका के सबसे घातक 'अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर' का हूबहू ढांचा; चलती हुई जहाजों को मिसाइल से उड़ाने की चल रही है सीक्रेट ट्रेनिंग।

12 Jul 2026  |  855

 

 

बीजिंग/वॉशिंगटन:

वैश्विक मंच पर अमेरिका और चीन के बीच जारी सैन्य होड़ अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। हाल ही में सामने आईं कुछ चौंकाने वाली सैटेलाइट तस्वीरों ने चीनी सेना (PLA) के खतरनाक मंसूबों को बेनकाब कर दिया है। तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन ने शिनजियांग के सुदूर रेगिस्तान में स्थित 'रुओकियांग टेस्ट रेंज' में अमेरिका के सबसे घातक युद्धपोत 'अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर' का हूबहू और असली आकार का एक नकली ढांचा (Mock-up) तैयार किया है, जिसका इस्तेमाल वह मिसाइल टेस्टिंग के लिए कर रहा है।

चलते हुए टारगेट पर सटीक वार: क्या है चीन की प्लानिंग?

रक्षा विशेषज्ञों और अमेरिकी नौसेना संस्थान (USNI) के अनुसार, चीन इस नकली अमेरिकी युद्धपोत का इस्तेमाल अपनी 'एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल' (ASBM) की मारक क्षमता को परखने और अपने सैनिकों को ट्रेनिंग देने के लिए कर रहा है।

इस पूरी तैयारी में सबसे हैरान करने वाली बात यह है:

रेगिस्तान में बिछाया रेल सिस्टम: सैटेलाइट तस्वीरों में रेगिस्तान के बीचों-बीच एक 6 मीटर चौड़ा रेल ट्रैक दिखाई दिया है। इस ट्रैक पर जहाज के आकार का यह ढांचा चलता है। इसका सीधा मतलब है कि चीन समुद्र में गतिशील या चलते हुए युद्धपोतों पर सटीक निशाना लगाने की तकनीक विकसित कर रहा है।

सेंसर्स से लैस है ढांचा: इमेजरी विश्लेषण करने वाली संस्था 'ऑलसोर्स एनालिसिस' के मुताबिक, इस नकली जहाज पर कई तरह के आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। इससे साफ है कि चीन एक लंबी प्लानिंग के तहत अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी को अमेरिकी जहाजों को पूरी तरह तबाह करने के लिए अपग्रेड कर रहा है।

चीन के निशाने पर 'अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर' ही क्यों?

सवाल उठता है कि चीन ने इसी खास अमेरिकी युद्धपोत को ही अपना टारगेट क्यों चुना? दरअसल, यह गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर अमेरिकी नौसेना की रीढ़ माना जाता है।

क्यों खास है यह युद्धपोत?

यह अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स (विमानवाहक पोतों) को सुरक्षा चक्र प्रदान करता है, हवा से होने वाले दुश्मन के हमलों को रोकता है और लंबी दूरी तक मिसाइल दागने में माहिर है। हाल ही में ईरान के साथ हुए टकराव में भी अमेरिका ने इसका जमकर इस्तेमाल किया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जापान में तैनात अमेरिका के 7वें बेड़े (7th Fleet) के पास ऐसे 10 युद्धपोत हैं, जो अक्सर प्रशांत महासागर में चीनी नौसेना के सामने चुनौती बनकर खड़े रहते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी: क्या युद्ध की तैयारी में है चीन?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम इस बात का साफ संकेत है कि वह अमेरिका के साथ भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित सैन्य टकराव को बेहद गंभीरता से ले रहा है। भले ही राजनयिक स्तर पर दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर चल रहा हो, लेकिन बीजिंग अंदर ही अंदर युद्ध की तैयारियों को धार दे रहा है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगा खतरा:

अगर चीन इस सीक्रेट टेस्टिंग के जरिए अपनी मिसाइलों की गाइडेंस प्रणाली (सटीक निशाना लगाने की क्षमता) को पूरी तरह दुरुस्त कर लेता है, तो हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों, उनके सहयोगियों (जैसे ताइवान और जापान) और सैनिकों के लिए सुरक्षा जोखिम कई गुना बढ़ जाएगा। ड्रैगन की यह नई चाल आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव को और ज्यादा भड़का सकती है।

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