छत्तीसगढ़ में 'हरित क्रांति' का नया अध्याय: विष्णु देव साय सरकार ने लागू की सीबीजी (CBG) नीति 2026

कचरे और पराली से बनेगी कम्प्रेस्ड बायोगैस; सिंगल विंडो से मिलेगी निवेशकों को छूट, गोबर और कृषि अवशेष बेचकर किसानों की बढ़ेगी आमदनी।

12 Jul 2026  |  824

 

 

रायपुर:

छत्तीसगढ़ में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया जीवन देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद प्रदेश में आधिकारिक तौर पर 'छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) नीति 2026' लागू कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य के नगरीय निकायों की भूमिका सबसे अहम होने वाली है।

नई नीति के तहत राज्य में गोबर, कृषि अवशेष, पराली और अन्य जैविक कचरों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन किया जाएगा। इससे जहां एक तरफ पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

 निवेशकों के लिए 'रेड कार्पेट': सिंगल विंडो और मंडी शुल्क से राहत

साय सरकार का मुख्य लक्ष्य प्रदेश में बायोगैस आधारित उद्योगों के लिए एक बेहद अनुकूल और सुलभ माहौल तैयार करना है। इसके लिए नीति में कई बड़े प्रावधान किए गए हैं:

सिंगल विंडो क्लीयरेंस: निवेशकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए अनुमतियों की प्रक्रिया को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत बेहद आसान और पारदर्शी बनाया गया है।

मंडी शुल्क से बड़ी राहत: बायोगैस संयंत्रों के लिए आवश्यक फीडस्टॉक (कृषि अवशेष और जैविक सामग्री) पर मंडी शुल्क से पूरी तरह राहत दी गई है। इससे संयंत्रों की परिचालन लागत कम होगी और निवेशकों को नई औद्योगिक नीति के तहत कई वित्तीय रियायतें भी मिलेंगी।

बुनियादी ढांचे में सहयोग: सरकार बायोगैस प्लांट लगाने के लिए जमीन और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास में पूरा सहयोग करेगी। साथ ही बिजली शुल्क में भी विशेष छूट दी जाएगी।

 सिर्फ उत्पादन नहीं, बाजार तैयार करने पर भी पूरा फोकस

इस नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल गैस उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके उपभोग के लिए एक मजबूत बाजार तैयार करने पर भी केंद्रित है:

परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव: सरकार सार्वजनिक परिवहन बसों, निजी वाहनों और नगरीय निकायों के वाहनों को सीएनजी/सीबीजी (CNG/CBG) में बदलने के लिए आवश्यक सहायता देगी। इसके अलावा, नीति की वैधता अवधि के दौरान सभी शैक्षणिक संस्थानों और शहरों में चलने वाले निजी परिवहन ऑपरेटरों को भी सीएनजी आधारित वाहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

 किसे क्या मिलेगा फायदा? एक नज़र में:

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

अतिरिक्त आय का जरिया: किसान अब अपने खेतों की पराली, कृषि अवशेष और गोबर को सीधे उद्योगों को बेचकर अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे।

सस्ती खेती: बायोगैस उत्पादन के सह-उत्पाद के रूप में मिलने वाले उच्च गुणवत्ता वाले बायो-उर्वरक (जैविक खाद) से खेती की लागत में बड़ी कमी आएगी।

स्थानीय रोजगार: ग्रामीण क्षेत्रों में इन उद्योगों के लगने से स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

आम जनता और पर्यावरण को लाभ

प्रदूषण से मुक्ति: शहरों और गांवों में जैविक कचरे के उचित प्रबंधन से गंदगी दूर होगी और पराली जलाने की समस्या से राहत मिलेगी।

हरित ऊर्जा की ओर कदम: राज्य में स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी।

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