स्कूलों में 'सेक्स एजुकेशन' अनिवार्य करने की तैयारी, केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी का इंतजार, NCERT तैयार करेगा विशेष पाठ्यक्रम

पॉक्सो के दुरुपयोग और किशोरों के आपसी संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बाद सरकार का बड़ा कदम; NCERT तैयार करेगा विशेष पाठ्यक्रम।

14 Jul 2026  |  1004

 

 

नई दिल्ली:

भारत में लंबे समय से 'सेक्स एजुकेशन' (यौन शिक्षा) को लेकर चली आ रही सामाजिक झिझक अब हमेशा के लिए खत्म होने की कगार पर है। केंद्र सरकार ने इसे स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की पूरी तैयारी कर ली है और अब इस पर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।

अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ को इस महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की जानकारी दी।

 सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता: 'झूठी प्रतिष्ठा के लिए पॉक्सो का दुरुपयोग'

यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट द्वारा किशोरों के आपसी सहमति वाले प्रेम संबंधों और पॉक्सो (POCSO) कानून के दुरुपयोग पर जताई गई गंभीर चिंता के बाद तेज हुई है।

अदालत की टिप्पणी: शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि कई मामलों में 16 से 18 वर्ष की उम्र के किशोर आपसी सहमति से संबंध बनाकर घर छोड़ देते हैं। इसके बाद, माता-पिता 'झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा' (Honor) के नाम पर कानून का सहारा लेकर आपराधिक मामले दर्ज करा देते हैं, जिससे किशोरों का भविष्य दांव पर लग जाता है।

उच्च स्तरीय पैनल का गठन: इस संवेदनशील मुद्दे और किशोरों की निजता के अधिकार की जांच के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में 26 सदस्यों वाले एक उच्च स्तरीय पैनल का गठन किया गया था।

 एक्सपर्ट पैनल की बड़ी सिफारिशें: प्राइमरी लेवल से ही शुरू होगी पढ़ाई

पैनल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा देने के लिए कई क्रांतिकारी सुझाव दिए गए हैं:

NCERT तैयार करेगा सिलेबस: पैनल ने सिफारिश की है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) इस विषय का एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार करे। इसे नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रावधानों के अनुरूप लागू किया जाएगा।

एक्सपर्ट टीचर की होगी नियुक्ति: प्राइमरी स्कूल के स्तर से ही बच्चों को यौन शिक्षा और बाल यौन शोषण (Child Sexual Abuse) के प्रति जागरूक करने के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।

हफ्ते में दो बार स्पेशल क्लास: स्कूलों में अनिवार्य रूप से सप्ताह में दो बार 20-20 मिनट की विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि बच्चों को वैज्ञानिक और सही जानकारी मिल सके।

 सामाजिक बदलाव की ओर एक बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ किशोरों में जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि अनजाने में होने वाले अपराधों और पॉक्सो के तहत दर्ज होने वाले झूठे मामलों में भी भारी कमी आएगी। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिसके बाद देश के शिक्षा तंत्र में यह ऐतिहासिक सुधार लागू किया जा सकेगा।

अन्य खबरें