पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG दक्षता नीति की मांग, पुणे गैस ने पेट्रोलियम मंत्रालय को सौंपा बड़ा प्रस्ताव, ₹1884 से ₹3100 तक पहुंची कीमत

₹1884 से ₹3100 तक पहुंची कमर्शियल सिलेंडर की कीमत; बर्बादी रोकने, चोरी पर लगाम लगाने और 47.5 किलो के LOT सिलेंडरों को बढ़ावा देने का सुझाव।

14 Jul 2026  |  1092

 

 

नई दिल्ली/पुणे:

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला (Fuel Supply Chain) बुरी तरह चरमरा गई है। इस संकट के बीच भारत में घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अग्रणी ऊर्जा कंपनी 'पुणे गैस' (Pune Gas) ने एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने केंद्र सरकार से देश में एलपीजी के कुशल और नियंत्रित इस्तेमाल के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है।

पुणे गैस ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को एक व्यापक प्रस्ताव सौंपकर 'एलपीजी एफिशिएंसी पॉलिसी फ्रेमवर्क' (LPG Efficiency Policy Framework) लागू करने का सुझाव दिया है।

आसमान छूती कीमतें: सेक्टर्स पर चौतरफा मार

कंपनी ने अपने प्रस्ताव में बढ़ती कीमतों के आंकड़ों के साथ चिंता जताई है। वर्ष की शुरुआत में जो कमर्शियल (व्यावसायिक) एलपीजी सिलेंडर 1,884 रुपये का था, उसकी कीमत अब बढ़कर 3,100 रुपये के पार पहुंच चुकी है। कीमतों में हुए इस भारी उछाल का सीधा और गहरा असर रेस्तरां, होटल, अस्पताल, बेकरी और अन्य छोटे-बड़े औद्योगिक क्षेत्रों (Industrial Sectors) पर पड़ा है, जिससे उनकी परिचालन लागत काफी बढ़ गई है।

प्रस्ताव की मुख्य बातें: बर्बादी और चोरी पर लगेगी लगाम

पुणे गैस के अनुसार, देश की ऊर्जा क्षमता को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए केवल आपूर्ति बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि एलपीजी के इस्तेमाल की दक्षता (Efficiency) को सुधारना बेहद जरूरी है। इस नीतिगत ढांचे के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:

कुशल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रतिष्ठानों में अधिक कुशल एलपीजी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए, जिससे गैस की बर्बादी को न्यूनतम किया जा सके।

47.5 किलोग्राम वाले LOT सिलेंडरों को बढ़ावा: इंडस्ट्री में 'लिक्विड ऑफ-टेक' (LOT) सिलेंडरों के उपयोग पर जोर दिया जाए। ये सिलेंडर न केवल एलपीजी की बर्बादी और चोरी रोकते हैं, बल्कि गैस आपूर्ति के बेहतर और सुरक्षित इस्तेमाल में भी मददगार साबित होते हैं।

पॉलिसी इंसेंटिव (नीतिगत प्रोत्साहन): सरकार उन उद्योगों को वित्तीय या नीतिगत प्रोत्साहन दे, जो तेजी से कुशल और आधुनिक एलपीजी सिस्टम को अपना रहे हैं।

"मौजूदा वैश्विक संकट को देखते हुए हमें एलपीजी के हर एक अंश का सही इस्तेमाल करना होगा। एक मजबूत एफिशिएंसी पॉलिसी न सिर्फ उद्योगों को राहत देगी, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी सुरक्षित करेगी।"पुणे गैस (प्रस्ताव का अंश)

'LPGenius' तकनीक से मिलेगी मदद

कंपनी ने इस बदलाव को धरातल पर उतारने के लिए अपने स्वदेशी एलपीजी मैनेजमेंट सिस्टम 'LPGenius' का भी जिक्र किया है। पुणे गैस ने पेट्रोलियम मंत्रालय और देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। कंपनी इसके लिए फील्ड डेटा जुटाने, केस स्टडीज तैयार करने और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करती है, तो यह वैश्विक मंदी और महंगे ईंधन के इस दौर में भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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