UNSC में भारत की दावेदारी: विदेश मंत्री जयशंकर ने पेश किया 'SHANTI' विजन, जानें जीत का पूरा समीकरण, ऐतिहासिक चुनाव के लिए भारत का अभियान शुरू

जून 2027 में होने वाले ऐतिहासिक चुनाव के लिए भारत का अभियान शुरू; एशिया-पैसिफिक ग्रुप की इकलौती सीट के लिए ताजिकिस्तान से सीधी टक्कर।

14 Jul 2026  |  1192

 

 

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली:

दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, जैसे यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और ईरान-इजरायल संकट के बीच, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर अपनी मजबूत धमक दर्ज कराने की तैयारी पूरी कर ली है. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान का शंखनाद कर दिया है.

इस वैश्विक मंच पर भारत सिर्फ एक उम्मीदवार के रूप में नहीं, बल्कि 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की बुलंद आवाज और दुनिया में शांति बहाल करने वाले एक उत्तरदायी नेतृत्व के तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर रहा है.

क्या है विदेश मंत्री का 'SHANTI' विजन?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए 'SHANTI' विजन को दुनिया के सामने रखा. यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को सुधारने का भारत का मूल मंत्र है:

$$\text{SHANTI} = \text{Securing Holistic Advancement through Norms, Trust, and Integrity}$$

अर्थात, "नियमों, विश्वास और ईमानदारी के माध्यम से समग्र प्रगति को सुरक्षित करना।" भारत का तर्क है कि आज की खंडित दुनिया में शांति और समृद्धि तभी संभव है जब सभी देश अंतर्राष्ट्रीय नियमों का सम्मान करें और एक-दूसरे पर भरोसा जताएं.

6 बिंदुओं में समझें: UNSC का चुनाव, भारत का दावा और स्थायी सदस्यता की राह

1. UNSC चुनाव का गणित और दो-तिहाई बहुमत का नियम

सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में गुप्त मतदान (Secret Ballot) के जरिए होता है.

सीटों का गणित: सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 स्थायी (P5) और 10 अस्थायी होते हैं.

वोटों की जरूरत: 193 सदस्यीय महासभा में जीतने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले देशों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. यानी भारत को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 128 से 129 वोटों की दरकार होगी।

2. इस बार मुकाबला क्यों है रोचक? (ताजिकिस्तान की चुनौती)

अक्सर भारत निर्विरोध या बेहद कमजोर चुनौती के खिलाफ चुनाव लड़ता रहा है (जैसे 2021 के चुनाव में भारत को 192 में से 184 वोट मिले थे)। लेकिन इस बार राह उतनी आसान नहीं है। एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group) की इकलौती सीट के लिए भारत का सीधा मुकाबला ताजिकिस्तान से है. ताजिकिस्तान को 57 मुस्लिम बहुल देशों के संगठन OIC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) का समर्थन मिलने की प्रबल संभावना है. ऐसे में भारत को अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों के बीच अपनी कूटनीतिक लामबंदी को बेहद मजबूत करना होगा.

3. भारत का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड और वैश्विक साख

भारत अब तक 8 बार (सबसे हालिया 2021-22 में) सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है.

विश्व शांति में योगदान: संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UN Peacekeeping) में भारत का योगदान अतुलनीय है। अब तक भारत ने 50 से अधिक मिशनों में लगभग 3 लाख सैनिक भेजे हैं.

संकटमोचक की भूमिका: कोरोना महामारी के दौरान भारत की 'वैक्सीन कूटनीति' हो या युद्ध के समय ग्लोबल साउथ के देशों के लिए खाद्यान्न और फर्टिलाइजर संकट का मुद्दा उठाना, भारत ने हमेशा एक जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी की भूमिका निभाई है.

4. सुरक्षा परिषद में अस्थायी बनाम स्थायी सीट का अंतर

अस्थायी सदस्य केवल 2 वर्ष के लिए चुने जाते हैं और उनके पास वीटो पावर (Veto Power) नहीं होती. वहीं, स्थायी सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन) का कार्यकाल कभी खत्म नहीं होता और उनके पास 'वीटो' जैसी असीमित शक्ति होती है. यदि सुरक्षा परिषद के 14 देश किसी प्रस्ताव के पक्ष में हों और कोई एक स्थायी देश भी वीटो कर दे, तो वह प्रस्ताव वहीं खारिज हो जाता है।

5. स्थायी सदस्यता का सपना और G4 देशों की मांग

भारत लंबे समय से मांग कर रहा है कि 1945 के द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में बना संयुक्त राष्ट्र का ढांचा आज की वास्तविकताओं से कोसों दूर है. दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत स्थायी सदस्यता का वास्तविक हकदार है।

G4 गठबंधन: भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील (G4 देश) मिलकर सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग कर रहे हैं।

P5 का रुख: चीन को छोड़कर बाकी के 4 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन) भारत की स्थायी सीट का मौखिक समर्थन करते हैं, लेकिन चीन हमेशा इसमें अड़ंगा लगा देता है.

6. भारत के लिए क्यों बेहद महत्वपूर्ण है यह सीट?

सुरक्षा परिषद की यह सीट भारत की विदेश नीति को धार देने के लिए संजीवनी की तरह है। इसके जरिए भारत सीमा पार आतंकवाद (जैसे लश्कर और जैश के आतंकियों को वैश्विक आतंकी घोषित कराना) के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बना सकता है। साथ ही पाकिस्तान के झूठे प्रोपेगेंडा को वैश्विक मंच पर ध्वस्त करने और समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) को मजबूत करने के लिए यह मंच भारत को रणनीतिक बढ़त देता है.

"हम एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और न्यायसंगत दुनिया के लिए काम करेंगे—एक ऐसी दुनिया जहां ग्लोबल साउथ की आवाज को बराबर का सम्मान मिले।"

एस. जयशंकर, विदेश मंत्री (न्यूयॉर्क में अभियान लॉन्च के दौरान)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा न्यूयॉर्क में दिए गए इस भाषण के मुख्य अंश और 'SHANTI' विजन की विस्तृत रूपरेखा को इस Jaishankar Unveils India's 'SHANTI' Vision Video में देखा जा सकता है, जो भारत के इस कूटनीतिक अभियान की प्राथमिकताओं को संक्षेप में स्पष्ट करता है.

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