मध्य प्रदेश में UCC की दस्तक: उच्च स्तरीय समिति ने CM मोहन यादव को सौंपा फाइनल ड्राफ्ट, जानें क्या हैं बड़ी बातें, 4 भाग, 404 धाराएं और 9.58 लाख सुझाव

4 भाग, 404 धाराएं और 9.58 लाख सुझाव; आदिवासियों को दायरे से बाहर रखने की सिफारिश के साथ मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक।

14 Jul 2026  |  1170

 

 

भोपाल:

उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश भी समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ गया है। राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यूसीसी (Uniform Civil Code) का फाइनल प्रतिवेदन (रिपोर्ट) सौंप दिया है। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक विशेष बैठक में समिति के सदस्यों ने 3 खंडों में संकलित इस ऐतिहासिक दस्तावेज को मुख्यमंत्री के सुपुर्द किया।

इस अवसर पर सीएम डॉ. यादव ने समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार करने के लिए समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह, अनूप नायर सहित सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। रिपोर्ट मिलते ही मुख्यमंत्री ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और उसे इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी।

3 खंड, 404 धाराएं: समझें ड्राफ्ट का पूरा ढांचा

समिति द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट बेहद व्यापक है और इसे तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:

पहला खंड (अनुशंसाएं): इसमें कुल 10 अध्याय हैं, जिनमें अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और मध्य प्रदेश की विभिन्न प्रचलित विधियों, सामाजिक नियमों और प्रथाओं का गहन विश्लेषण करने के बाद समिति ने अपनी सिफारिशें दर्ज की हैं।

दूसरा खंड (विधेयक का प्रारूप): यह पूरी तरह से प्रस्तावित कानून का मसौदा (विधेयक) है। इसमें मध्य प्रदेश की मौजूदा सामाजिक और कानूनी व्यवस्था को ध्यान में रखा गया है। इस प्रस्तावित विधेयक में कुल 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं।

तीसरा खंड (जन परामर्श रिपोर्ट): इस खंड में जनता से प्राप्त सुझावों का पूरा लेखा-जोखा है। समिति को जिला स्तर, राज्य स्तर और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से रिकॉर्ड 9.58 लाख से अधिक परामर्श प्राप्त हुए। इस खंड में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार (Gender-wise) और समुदायवार विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

ड्राफ्ट की 5 सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बातें

समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण (Maintenance), उत्तराधिकार, गोद लेना (Adoption) और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे पारिवारिक व व्यक्तिगत विषयों के अध्ययन का जिम्मा सौंपा गया था। ड्राफ्ट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

अनुसूचित जनजातियों (ST) को छूट: समिति ने मध्य प्रदेश की विशाल जनजातीय आबादी की अनूठी परंपराओं का सम्मान करते हुए 'अनुसूचित जनजातियों' को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की स्पष्ट अनुशंसा की है।

लैंगिक समानता (Gender Equality): ड्राफ्ट का मूल आधार महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार देना और लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना है, विशेषकर पैतृक संपत्ति और गोद लेने के अधिकारों में।

रीति-रिवाजों का सम्मान: कानून लागू होने के बाद भी अलग-अलग धर्मों और समुदायों के पारंपरिक अनुष्ठान, जैसे शादी की रस्में या धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी।

लिव-इन रिलेशनशिप पर नियम: ड्राफ्ट में लिव-इन संबंधों को विनियमित (Regulate) करने और ऐसे संबंधों के पंजीकरण को लेकर महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

संवैधानिक मर्यादा: पूरा प्रारूप भारतीय संविधान के उपबंधों, मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

आगे का प्लान: कब तक बनेगा कानून?

मुख्यमंत्री को सौंपे जाने के बाद इस प्रतिवेदन को आधिकारिक तौर पर राज्य शासन के विधि विभाग (Law Department) को हस्तांतरित कर दिया गया है।

"विधेयक के तकनीकी परिमार्जन (Refinement) और वरिष्ठ सचिव समिति की समीक्षा के बाद इसे मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही सरकार की योजना इसे आगामी मानसून सत्र में ही विधानसभा के पटल पर रखने की है।"

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार

'वोट बैंक की राजनीति बंद करे कांग्रेस' — सीएम डॉ. मोहन यादव

UCC की रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:

"चाहे यूसीसी का मुद्दा हो या भोजशाला का, कांग्रेस हर विषय को केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। इस मामले में सबसे सकारात्मक बात यह रही कि प्रदेश के सभी धर्मों के नागरिकों ने आगे आकर अपने विचार खुलकर और स्पष्ट रूप से रखे हैं। जनता अपनी राय दे चुकी है, अब कांग्रेस को भी इस विषय पर देश और प्रदेश के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।"

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