गया में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: दूसरी किस्त के ₹20,000 पाने के लिए महिलाओं को पूरे करने होंगे ये 6 कड़े मानदंड

जिला परियोजना समन्वय इकाई में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न; नोडल अधिकारियों ने दी पीपीटी के जरिए जानकारी, पहली किस्त के बाद कड़े मूल्यांकन से गुजरेगी पात्रता।

14 Jul 2026  |  1033

 

 

गया:

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' को धरातल पर अधिक प्रभावी बनाने और महिला उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए गया जिले में प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में सोमवार को जिला परियोजना समन्वय इकाई में परियोजना कर्मियों के लिए एक दिवसीय विशेष अभिमुखीकरण (Orientation) कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम संगठन स्तर पर महिलाओं को दिए जाने वाले वित्तीय साक्षरता एवं लेखांकन (Financial Literacy & Accounting) प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करना था, ताकि हर लाभार्थी महिला अपने व्यवसाय को पेशेवर तरीके से संचालित कर सके।

वित्तीय साक्षरता और लेखांकन ही सफलता की आधारशिला

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परियोजना प्रबंधक आचार्य मम्मट ने दो टूक कहा कि इस योजना का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्रशिक्षण की गुणवत्ता ग्राम संगठन के अंतिम पायदान तक पहुंचेगी। उन्होंने जोर देकर कहा:

"वित्तीय साक्षरता और सटीक लेखांकन किसी भी छोटे या बड़े उद्यम की सफलता की रीढ़ होते हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जिले की कोई भी पात्र महिला लाभार्थी इस जरूरी प्रशिक्षण से वंचित न रहे।"

इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र का संचालन योजना के नोडल अधिकारी अनुपम जान और कुंदन लाल साह द्वारा पीपीटी (PPT) के माध्यम से किया गया, जिसमें योजना के बारीक नियमों को समझाया गया।

किस्तों का गणित: पहली किस्त में ₹10,000, दूसरी में मिलेंगे ₹20,000

योजना के नोडल अधिकारी अनुपम जान ने वित्तीय सहायता की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया कि पात्र महिला लाभार्थियों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रथम किस्त के रूप में ₹10,000 की सहायता राशि दी जाती है।

इसके बाद, उनके द्वारा शुरू की गई स्वरोजगार गतिविधियों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) और निर्धारित मानकों का कड़ा मूल्यांकन किया जाएगा। जो महिलाएं इन मानकों पर खरी उतरेंगी, केवल उन्हें ही दूसरी किस्त के रूप में ₹20,000 की राशि सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाएगी।

दूसरी किस्त पाने के लिए पूरी करनी होंगी ये 6 शर्तें

अधिकारियों के मुताबिक, दूसरी किस्त की राशि कोई खैरात नहीं है, बल्कि इसे पाने के लिए लाभार्थियों को अपनी व्यावसायिक गंभीरता साबित करनी होगी। इसके लिए निम्नलिखित 6 मानदंड तय किए गए हैं:

1. वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण: ग्राम संगठन स्तर पर आयोजित होने वाले वित्तीय साक्षरता और लेखांकन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करना अनिवार्य होगा।

2. नियमित भागीदारी: महिला लाभार्थी को अपने स्वयं सहायता समूह (SHG) की बैठकों में अनिवार्य रूप से और नियमित रूप से शामिल होना होगा।

3. अनिवार्य बचत: लाभार्थी महिला द्वारा लगातार तीन महीनों तक समूह में नियमित बचत (Savings) की जानी चाहिए।

4. बिजनेस प्लान: व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक 'व्यावसायिक योजना' (Business Plan) तैयार करनी होगी।

5. ग्राम संगठन से हरी झंडी: तैयार की गई व्यावसायिक योजना पर संबंधित ग्राम संगठन (VO) से औपचारिक अनुमोदन (Approval) प्राप्त करना होगा।

6. रिकॉर्ड और ऋण भुगतान: व्यवसाय की आय-व्यय पंजी (लेजर बुक) का नियमित संधारण करना होगा और स्वयं सहायता समूह से लिए गए पुराने ऋण का समय पर भुगतान करना होगा।

भविष्य की राह

प्रशासन का मानना है कि इन कड़े नियमों से न केवल सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं में बैंकिंग प्रणाली और व्यापार प्रबंधन की समझ विकसित होगी। गया जिले की सैकड़ों जीविका दीदियां और महिला उद्यमी इस योजना के जरिए आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखने को तैयार हैं।

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