रांची:
झारखंड सरकार ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने और जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने 'झारखंड राज्य सहकारिता नीति-2025' का व्यापक मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार कर लिया है।
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सहकारिता नीति के सिद्धांतों पर आधारित इस 39 पृष्ठों के ऐतिहासिक ड्राफ्ट को फरवरी 2026 में अंतिम रूप दिया गया है। अब इसे जल्द ही अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) के समक्ष भेजा जाएगा। इस नीति का मुख्य विज़न 'सहकार से समृद्धि' के सपने को धरातल पर उतारना है।
सहकारिता का वर्तमान ढांचा बनाम भविष्य का लक्ष्य
झारखंड में सहकारिता का बुनियादी ढांचा पहले से ही मजबूत है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता का पूरा दोहन होना अभी बाकी है। नई नीति के जरिए सरकार इस पूरे परिदृश्य को बदलने जा रही है:
| मानक | वर्तमान स्थिति | आगामी लक्ष्य (10 वर्ष) |
|---|---|---|
| परिवारों का जुड़ाव | केवल 35.89% परिवार | 100% शहरी और ग्रामीण परिवार |
| कुल सदस्य संख्या | लगभग 27.55 लाख सदस्य | 1 करोड़ से अधिक लोग |
| सहकारी समितियां | 11,988 पंजीकृत (7,903 सक्रिय) | सभी समितियों को 100% सक्रिय व बहुउद्देश्यीय बनाना |
| आर्थिक योगदान | सीमित | अर्थव्यवस्था में योगदान 3 गुना करना |
संस्थागत ढांचा: वर्तमान में राज्य सहकारी बैंकिंग प्रणाली का नेतृत्व 'झारखंड राज्य सहकारिता बैंक लिमिटेड' (मुख्यालय: रांची) कर रहा है, जो 3 क्षेत्रीय कार्यालयों और 105 शाखाओं के जरिए काम करता है।
छह रणनीतिक स्तंभों पर टिकी है नई नीति
सहकारिता को राज्य में एक व्यापक जन आंदोलन बनाने और इसे समय के साथ आधुनिक रूप देने के लिए 6 रणनीतिक मिशन स्तंभ तय किए गए हैं:
समय पर लोकतांत्रिक चुनाव: सहकारी समितियों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 'स्वतंत्र सहकारी समितियां निर्वाचन प्राधिकरण' या 'राज्य चुनाव आयोग' के जरिए समय पर पारदर्शी चुनाव कराए जाएंगे।
आदर्श सहकारी ग्राम और डीएमएफटी फंड: राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक 'आदर्श सहकारी गांव' का विकास किया जाएगा। इसके अलावा, खनन प्रभावित क्षेत्रों में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड का उपयोग करके नई सहकारी समितियां खड़ी की जाएंगी।
डिजिटल क्रांति (को-ऑपरेटिव स्टैक): पारदर्शी और डेटा-आधारित फैसलों के लिए 'को-ऑपरेटिव स्टैक' का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, सहकारी समितियों को GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस), ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) और e-NAM जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों से सीधे जोड़ा जाएगा।
समावेशी सहभागिता और आरक्षण: इस आंदोलन में महिलाओं, युवाओं, दिव्यांगों और एससी/एसटी वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति (ST) बहुल क्षेत्रों में सहकारी समितियों के अध्यक्ष का पद आरक्षित करने का प्रस्ताव है।
विविध व्यावसायिक गतिविधियां: अब समितियां केवल ऋण देने तक सीमित नहीं रहेंगी। वे जन औषधि केंद्र, पेट्रोल पंप, ड्रोन-आधारित कृषि सेवाएं, सोलर एनर्जी और कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) जैसे नए दौर के व्यवसायों का संचालन करेंगी।
शिक्षा में सहकारिता: युवाओं को इस क्षेत्र में दीर्घकालिक करियर बनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रमों में 'सहकारिता' को एक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा।
कड़क निगरानी और 'JHASCAP' ब्रांड से वैश्विक पहचान
नीति को कागजों से निकालकर जमीन पर उतारने के लिए एक मजबूत त्रिकोणीय निगरानी तंत्र बनाया गया है:
नीति निर्धारण: सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में 'राज्य सहकारी नीति संचालन समिति' बनेगी।
क्रियान्वयन: सहकारिता सचिव की अध्यक्षता में 'राज्य सहकारिता नीति कार्यान्वयन और निगरानी समिति' काम करेगी।
ग्राउंड सपोर्ट: जमीनी स्तर पर तकनीकी और रणनीतिक मदद के लिए एक समर्पित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) का गठन किया जाएगा।
बिचौलियों का अंत, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच
इस नई नीति के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में बिचौलियों और साहूकारों का वर्चस्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा। सबसे खास बात यह है कि झारखंड के अनूठे स्थानीय उत्पादों जैसे— लाह (Lac), महुआ, हस्तशिल्प और पारंपरिक सोहराय-खोवार पेंटिंग्स को सरकार 'JHASCAP' (Jharkhand State Co-operative Product) ब्रांड के तहत वैश्विक बाजार में पेश करेगी। इससे सीधे तौर पर आदिवासियों और ग्रामीण कारीगरों की आय में भारी बढ़ोतरी होगी।