'दिल में बाबर, मुंह में राम' के नारे पर भड़का- सुलग उठा सीतापुर: अखिलेश यादव के विवादित होर्डिंग पर भड़के सपा सांसद, सरेआम फूंका पोस्टर

'दिल में बाबर, मुंह में राम' के नारे पर भड़का समाजवादियों का गुस्सा; आनंद भदौरिया ने बीजेपी और प्रशासन पर मढ़ा साजिश का आरोप, माहौल बिगाड़ने की कोशिश करार।

14 Jul 2026  |  1109

 

 

सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बनाकर लगाए गए एक विवादित होर्डिंग ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। शहर की कांशीराम कॉलोनी के समीप बाईपास पर लगे इस आपत्तिजनक पोस्टर को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। सूचना मिलते ही सपा सांसद आनंद भदौरिया भारी लाव-लश्कर के साथ खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ होर्डिंग को नीचे उतरवाया, बल्कि सरेआम उसमें आग लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

विवादित पोस्टर में क्या था?

बाईपास पर लगाए गए इस अज्ञात होर्डिंग में सपा संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ बेहद तल्ख टिप्पणी की गई थी। पोस्टर पर बड़े-बड़े अक्षरों में “दिल में बाबर, मुंह में राम” लिखा गया था। नेशनल हाईवे पर इस तरह के पोस्टर के सामने आते ही राहगीरों और स्थानीय लोगों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई, जिसने देखते ही देखते बड़े राजनीतिक बवाल का रूप ले लिया।

"यह कायराना हरकत है" – सांसद आनंद भदौरिया का तीखा हमला

होर्डिंग को आग के हवाले करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए सांसद आनंद भदौरिया ने सरकार और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे विपक्षी दलों की एक 'कायराना हरकत' करार दिया।

सांसद ने सीधे तौर पर बीजेपी और सरकारी तंत्र को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए:

सरकारी मशीनरी पर शक: भदौरिया ने आरोप लगाया कि यह किसी आम स्थानीय व्यक्ति का काम नहीं हो सकता। इसमें सरकारी तंत्र, विशेषकर सूचना विभाग की मौन सहमति या संलिप्तता हो सकती है।

माहौल बिगाड़ने की साजिश: उन्होंने कहा कि ऐसे नफरती और भड़काऊ होर्डिंग लगाकर उत्तर प्रदेश के शांत माहौल को जानबूझकर खराब करने की कोशिश की जा रही है।

कड़ी कार्रवाई की मांग: सपा सांसद ने स्थानीय प्रशासन को चेतावनी देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों को तत्काल सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है।

बार-बार दोहराई जा रही है घटना; प्रशासन मौन

दिलचस्प बात यह है कि सीतापुर में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते 22 जून को भी लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (बाईपास) पर इसी तरह के विवादित पोस्टर दिखाई दिए थे, जिन्हें सपा नेताओं ने फाड़कर जला दिया था।

हैरानी की बात यह है कि इस विवादित होर्डिंग पर किसी भी व्यक्ति, संस्थान या राजनीतिक संगठन का नाम दर्ज नहीं है। वहीं, बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल इस पूरे मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, जिससे सपा कार्यकर्ताओं का अविश्वास और गहरा गया है।

सपा बनाएगी जवाबी रणनीति

सांसद आनंद भदौरिया ने साफ किया है कि इस गंभीर मामले को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व (अखिलेश यादव) के संज्ञान में लाया जा रहा है। उन्होंने एलान किया कि इस तरह की दुर्भावनापूर्ण राजनीति का मुकाबला करने के लिए समाजवादी पार्टी जल्द ही एक ठोस रणनीति तैयार करेगी। बहरहाल, इस घटना के बाद से सीतापुर सहित पूरे प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

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