कोलकाता वापसी: दो दशक बाद फिर 'सिटी ऑफ जॉय' लौटेंगी तसलीमा नसरीन, नई सरकार में मुख्यमंत्री के साथ साझा करेंगी मंच

साल 2007 के हिंसक विरोध के बाद छोड़ना पड़ा था बंगाल; अब 1 अगस्त को कट्टरपंथ-विरोधी साहित्यिक मंच से हुंकार भरेंगी निर्वासित लेखिका; राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज।

14 Jul 2026  |  844

 

 

कोलकाता। बांग्लादेश की प्रसिद्ध और निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन करीब दो दशक के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर उस शहर में कदम रखने जा रही हैं, जिसे कभी उन्हें मजबूरन छोड़ना पड़ा था। आगामी 1 अगस्त को तसलीमा नसरीन कोलकाता में आयोजित होने वाले एक भव्य कट्टरपंथ-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगी। बंगाल की राजनीति में आए हालिया बदलावों के बीच उनकी इस वापसी को बेहद महत्वपूर्ण और एक बड़े सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

तसलीमा नसरीन ने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस बात की पुष्टि की है कि वह कोलकाता के ऐतिहासिक रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगी।

कट्टरपंथ के खिलाफ गूंजेगी कविता की आवाज

धर्मनिरपेक्ष और कट्टरपंथ-विरोधी संगठनों के साझा मंच द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल साहित्यिक विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी हैं।

कविता पाठ करेंगी तसलीमा: इस कार्यक्रम में तसलीमा नसरीन द्वारा विशेष कविता पाठ किए जाने की उम्मीद है।

बदली सियासी बयार: यह आयोजन पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के कुछ महीनों बाद हो रहा है। राज्य की वर्तमान भाजपा-नीत सरकार इसे पूर्ववर्ती सरकारों की 'तुष्टिकरण और कट्टरपंथ के आगे झुकने की नीति' के अंत के रूप में पेश कर रही है।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी: आयोजकों में से एक, 'पश्चिमबांगर जोनो संगठन' के मोहित रॉय ने बताया कि इस ऐतिहासिक पुनरागमन कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

साल 2007 का वो दौर: जब रातों-रात छोड़ना पड़ा था शहर

तसलीमा नसरीन के कोलकाता छोड़ने की कहानी बंगाल के इतिहास के सबसे विवादास्पद अध्यायों में से एक है।

साल 2007 में तसलीमा की आत्मकथा 'द्विखंडिता' के कुछ अंशों के प्रकाशन के बाद कोलकाता में हिंसक विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे। कट्टरपंथी संगठनों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए तत्कालीन वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सरकार ने तसलीमा नसरीन को सुरक्षा देने के बजाय उन्हें शहर छोड़ने का फरमान सुना दिया था। 21 नवंबर 2007 को उन्हें पहले जयपुर और फिर दिल्ली भेज दिया गया था। तब से वह लगातार निर्वासन का दर्द झेल रही थीं।

"पूर्ववर्ती सरकारों ने तसलीमा का इस्तेमाल किया" – मंत्री अग्निमित्रा पॉल

तसलीमा नसरीन के बंगाल आगमन पर राज्य सरकार की कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पूर्ववर्ती सरकारों (वामपंथ और तृणमूल कांग्रेस) पर तीखा हमला बोला है।

अग्निमित्रा पॉल ने अपने बयान में कहा:

"पिछली सरकारों के कार्यकाल में तसलीमा नसरीन को बंगाल आने का मौका नहीं दिया गया। सच तो यह है कि उन्हें सुरक्षा ही नहीं दी गई। पूर्ववर्ती सरकारों ने सिर्फ मुसलमानों के नाम पर राजनीति की और उनका इस्तेमाल किया, लेकिन जब तसलीमा जी ने अपनी किताब में सच लिखा, तो उन्हें अकेला छोड़ दिया गया। आज मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जी के नेतृत्व वाली सरकार में तसलीमा नसरीन 1 तारीख को आ रही हैं, यह हमारे राज्य के लिए बेहद गर्व और खुशी की बात है।"

अभिव्यक्ति की आजादी पर नई बहस

तसलीमा नसरीन की यह वापसी बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और राजनीति के नए समीकरणों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे चुकी है। जहां समर्थक इसे अभिव्यक्ति की आजादी की जीत बता रहे हैं, वहीं विपक्षी खेमे इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। बहरहाल, 1 अगस्त को रवींद्र सदन का मंच एक बार फिर इतिहास बनते देखने के लिए तैयार है।

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