थोक महंगाई की चौतरफा मार: जून में बढ़कर 9.87% हुई दर, लगातार 8वें महीने लगा झटका, खाने-पीने की चीजें भी हुईं महंगी

पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों का असर; खाने-पीने की चीजें भी हुईं महंगी; खुदरा महंगाई भी 17 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची।

14 Jul 2026  |  1086

 

 

नई दिल्ली। देश में आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक महंगाई की तपिश लगातार बढ़ती जा रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में देश की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। पिछले महीने यानी मई में यह 9.68% दर्ज की गई थी।

चिंताजनक बात यह है कि थोक महंगाई में लगातार आठवें महीने बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा है। इस उछाल के पीछे पश्चिम एशिया संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की प्रभावी नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल (मिनरल ऑयल) की कीमतों में तेजी और खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दाम मुख्य वजह बनकर उभरे हैं।

कैटेगरी के अनुसार महंगाई का पूरा ब्योरा

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों में महंगाई की स्थिति इस प्रकार रही:

कैटेगरीजून में महंगाई दरमई में महंगाई दर
ईंधन और बिजली (Fuel & Power)27.41%30.33%
खाद्य वस्तुएं (Food Items)5.49%3.60%
गैर-खाद्य वस्तुएं (Non-Food Items)11.07%-
खनिज (Minerals)9.45%-
विनिर्मित उत्पाद (Manufactured Products)7.48%7.48% (स्थिर)

 

विनिर्माण क्षेत्र का हाल: विनिर्मित उत्पादों की श्रेणी में कुल 24 उत्पाद समूहों में से 22 की कीमतों में महीने-दर-महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई। बेसिक मेटल, केमिकल, मशीनरी और खाद्य उत्पादों में सबसे अधिक तेजी रही, जबकि फार्मास्यूटिकल्स और फैब्रिकेटेड मेटल के दामों में आंशिक गिरावट आई।

सूचकांक (WPI Index) में बदलाव पर एक नजर

कुल कमोडिटीज का सूचकांक: मई के 109.9 से बढ़कर जून में 110.2 हो गया।

प्राइमरी आर्टिकल्स: इसका सूचकांक 113.7 से चढ़कर 116.1 पर पहुंच गया।

ईंधन और पावर: इसका सूचकांक 113.0 से घटकर 111.1 रहा।

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स: इसका सूचकांक 107.8 पर स्थिर रहा।

संशोधित आंकड़े (अप्रैल 2026): सरकार ने अप्रैल 2026 के लिए थोक महंगाई के अनंतिम अनुमान को 8.26% से संशोधित (Revise) कर 8.36% कर दिया है।

नई 'बेस ईयर' सीरीज (2022-23) का असर

यह डेटा सरकार द्वारा पिछले महीने ही लागू की गई नई WPI सीरीज के आधार पर जारी किया गया है, जिसका आधार वर्ष (Base Year) 2022-23 तय किया गया है।

इस नई सीरीज में देश के मौजूदा आर्थिक ढांचे को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए कमोडिटी बास्केट का दायरा बढ़ा दिया गया है।

अब इसमें वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है।

इसमें न्यूक्लियर इलेक्ट्रिसिटी के साथ-साथ सोलर और विंड एनर्जी जैसे रिन्यूएबल (नवीकरणीय) ऊर्जा स्रोतों को भी शामिल किया गया है।

खुदरा महंगाई ने भी बढ़ाई चिंता, 17 महीनों के हाई पर

थोक बाजार के साथ-साथ खुदरा बाजार भी उबल रहा है। जून महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर भी 17 महीने के उच्चतम स्तर 4.38% पर पहुंच गई, जो मई में 3.93% थी।

चूंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीतियां तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को ही ध्यान में रखता है, इसलिए यह बढ़ोतरी चिंताजनक है। सरकार ने आरबीआई को खुदरा महंगाई को 4% (प्लस-माइनस 2%) के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया है। हाल ही में आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है, जिसकी वजह वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में आ रही तेजी को माना जा रहा है।

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