'इथेनॉल को बढ़ावा देने में मेरा कोई निजी हित नहीं, फैलाया जा रहा है झूठ', 100% पेट्रोल के लिए देनी होगी ज्यादा कीमत -नितिन गडकरी का बड़ा बयान

"देश के कुल इथेनॉल बिजनेस में बेटों की हिस्सेदारी 0.5% से भी कम, कंपनियों पर है 1600 करोड़ का कर्ज"

15 Jul 2026  |  1309

 

 

नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल फ्यूल (Ethanol Fuel) के समर्थन को लेकर खुद पर लग रहे निजी हितों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के हित में वैकल्पिक ईंधन की वकालत करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटों के व्यवसाय में इथेनॉल का हिस्सा बहुत कम है और उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।

'बेटों के बिजनेस पर 1600 करोड़ का कर्ज, सिर्फ 10% हिस्सेदारी'

अपने परिवार और बेटों के बिजनेस पर खुलकर बात करते हुए नितिन गडकरी ने कहा, "हमारे पास चीनी मिल पहले से है और वह बिजनेस मेरे बेटे संभालते हैं। पूरे देश के इथेनॉल बिजनेस में मेरे बेटों की फैक्ट्रियों की हिस्सेदारी 0.5 फीसदी से भी कम है। उनके कुल बिजनेस में भी इथेनॉल का हिस्सा महज 10 फीसदी है, जिससे कमाई पर कोई खास असर नहीं पड़ता। उल्टा, उनकी कंपनियों पर 1600 करोड़ रुपये का कर्ज है।"

गडकरी ने यह भी साफ किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का प्रोग्राम पेट्रोलियम मंत्रालय चलाता है, इसलिए इसमें उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका या हस्तक्षेप नहीं है।

सिर्फ गन्ना नहीं, पराली और बांस से भी बन रहा इथेनॉल

वैकल्पिक ईंधनों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए गडकरी ने कहा कि भारत कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा आयातक है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है। उन्होंने कहा:

"मैं केवल गन्ने से बनने वाले इथेनॉल का समर्थन नहीं करता। इसकी शुरुआत मक्के से हुई थी। आज पानीपत में पराली से इथेनॉल बन रहा है, असम में बांस से और कई जगहों पर चावल से भी इसे तैयार किया जा रहा है। ब्राजील जैसे देश दशकों से इसका सफल इस्तेमाल कर रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि वे केवल इथेनॉल ही नहीं, बल्कि हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और अन्य सभी प्रकार के हरित व वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं।

100% पेट्रोल के लिए चुकानी होगी भारी कीमत

देश में 100% पेट्रोल की उपलब्धता के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने सचेत करते हुए कहा कि इसके लिए जनता को बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने उदाहरण दिया कि E85 (85% इथेनॉल मिश्रण) की कीमत E20 से भी कम बैठती है। दुनिया भर का रुख वैकल्पिक ईंधन की ओर होने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भले ही पश्चिम एशियाई देशों और अमेरिका के पास प्रचुर मात्रा में तेल है, लेकिन इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देश भी अब तेजी से बायोफ्यूल (Biofuel) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

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