'सुरक्षित हैं हम' का मैसेज भेजने के कुछ ही देर बाद भारतीय इंजीनियर की मौत, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरानी मिसाइल अटैक, रोते परिवार ने लगाई सरकार से गुहार

हमले से चंद मिनट पहले भेजा था 'सुरक्षित' होने का मैसेज; जहाज पर सवार 10 भारतीय बचाए गए, एक की मौत

15 Jul 2026  |  1098

 

 

पुणे/नई दिल्ली।

पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव अब भारतीय परिवारों के लिए गहरे जख्म लेकर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के हालातों के बीच, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait) में एक कमर्शियल जहाज पर हुए ईरानी मिसाइल हमले में पुणे के 30 वर्षीय भारतीय मरीन इंजीनियर हेरंब करमाकर की दर्दनाक मौत हो गई है। हेरंब की मौत की पुष्टि के बाद उनके शोकाकुल परिवार ने केंद्र सरकार से उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द और ससम्मान भारत वापस लाने की मार्मिक अपील की है।

'हम सुरक्षित हैं...' - आखिरी मैसेज के कुछ देर बाद ही तबाही

हेरंब करमाकर साइप्रस के कमर्शियल कार्गो शिप 'जीएफएक्स गैलेक्सी' (GFX Galaxy) पर तैनात थे। रविवार को हुए इस भीषण हमले से कुछ ही समय पहले हेरंब ने अपने परिवार को मैसेज कर आश्वस्त किया था कि उनका जहाज सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पार कर गया है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; इसके तुरंत बाद एक ईरानी मिसाइल ने जहाज को निशाना बनाया और जहाज पूरी तरह तबाह हो गया।

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, हमले के बाद हेरंब लापता हो गए थे, जिसके बाद परिवार लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रहा था। हालांकि, बाद में उनकी मृत्यु की पुष्टि हो गई।

10 भारतीय क्रू मेंबर्स सुरक्षित, दूतावास रख रहा नजर

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी शुरुआती आधिकारिक बयान के मुताबिक:

जहाज पर सवार कुल 10 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरक्षित बचा लिया गया है।

शुरुआत में एक भारतीय के लापता होने की रिपोर्ट थी, जो बाद में हेरंब करमाकर के रूप में चिन्हित हुए।

विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। सरकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे ये लगातार हमले बेहद चिंताजनक हैं। फिलहाल ओमान में स्थित भारतीय दूतावास ओमानी अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनी हालात और खोज अभियान पर नजर बनाए हुए है।

"पूरी जिंदगी बची थी उसकी..." - रो पड़ा परिवार

महज 30 साल की उम्र में हेरंब की मौत से उनके पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आईएएनएस (IANS) से बात करते हुए हेरंब के ससुर विवेक टंडन ने सरकार से हाथ जोड़कर अपील की:

"वह सिर्फ 30 साल का था, उसकी पूरी जिंदगी उसके सामने पड़ी थी। हमारी भारत सरकार से अब सिर्फ एक ही मांग है कि उसका पार्थिव शरीर सुरक्षित और पूरे सम्मान के साथ हमें सौंप दिया जाए। शव को जल्द से जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जाए।"

इस दुखद घटना ने वैश्विक संघर्षों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों (Shipping Lanes) में काम करने वाले हजारों भारतीय मरीन इंजीनियर्स और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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