ढाका/नई दिल्ली।
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना (78) के भारत से वापस स्वदेश लौटने की खबरों के बीच पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। ढाका ने हसीना के लौटने की योजना का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि उन्हें वहां कदम रखते ही एक 'मौत की सजा पाए दोषी' के तौर पर कड़े न्याय का सामना करना होगा।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में तख्तापलट और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना अपनी जान बचाकर भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं।
पार्टी को मजबूत करने के लिए हसीना की वापसी का प्लान
हाल ही में शेख हसीना के करीबी सूत्रों ने खुलासा किया था कि वह अपनी राजनीतिक पार्टी 'अवामी लीग' को फिर से खड़ा करने और उसे मजबूत करने के उद्देश्य से इस साल (2026) के अंत तक अपनी मर्जी से ढाका लौटने की तैयारी कर रही हैं। इसी घोषणा के बाद से बांग्लादेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
बांग्लादेश का कड़ा प्रहार: 'दुनिया के बेहतरीन वकील बुला लें हसीना'
शेख हसीना की वापसी की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश की अंतरिम प्रधानमंत्री के सलाहकार जाहेद उर रहमान ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बेहद सख्त लहजे में चुनौती दी।
दुनियाभर के वकीलों को बुलाने की चुनौती: रहमान ने कहा कि साल 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले शांतिपूर्ण आंदोलन पर शेख हसीना सरकार द्वारा की गई बेरहम कार्रवाई और मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के आरोपों से खुद को बचाने के लिए हसीना चाहें तो दुनिया के सबसे बेहतरीन वकीलों को ढाका बुला सकती हैं।
मौत की सजा भुगतने को रहें तैयार: रहमान ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम उनकी वापसी की घोषणा का स्वागत करते हैं क्योंकि हम न्याय सुनिश्चित करना चाहते हैं। देश की जनता चाहती है कि उनके अपराधों के लिए उन्हें दी गई मौत की सजा बरकरार रहे और उस स्थिति में उन्हें मौत की सजा दी जाएगी, क्योंकि लोग यही देखना चाहते हैं।"
पारदर्शी होगी अदालती कार्यवाही: बांग्लादेश सरकार के अनुसार, इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) की पूरी कानूनी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इसकी निगरानी कर सकेंगे और वीडियो कवरेज के जरिए इसका सीधा प्रसारण भी किया जा सकेगा।
वापसी में कानूनी अड़चन नहीं: ढाका
जाहेद उर रहमान ने भरोसा जताया कि ढाका लौटने में कोई प्रक्रियात्मक या तकनीकी मुद्दा बाधा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली और ढाका इस मामले पर आपस में बातचीत करके जरूरी इंतजाम कर सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2010 में खुद अवामी लीग के शासनकाल में गठित इस न्यायाधिकरण के फैसलों को पहले भी बदला या रोका जा चुका है, इसलिए कानून अपना काम निष्पक्षता से करेगा।
भारत का नपा-तुला रुख: 'यह पूरी तरह कानूनी मामला'
शेख हसीना की इस राजनीतिक योजना और बांग्लादेश के कड़े तेवरों के बीच भारत सरकार ने बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा:
"इस पूरे मामले पर हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रत्यर्पण (Extradition) का कोई भी मामला पूरी तरह से कानूनी होता है और इस विषय से कानून के तय नियमों के अनुसार ही निपटा जाएगा।"
इस बयान से साफ है कि भारत इस मामले को पूरी तरह से कानूनी और कूटनीतिक फ्रेमवर्क के तहत ही देख रहा है, जिससे आने वाले दिनों में भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नया मोड़ देखने को मिल सकता है।