रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ की धमकी: कांग्रेस का मोदी सरकार पर तीखा हमला, पूछा– 'विश्वगुरु बनने चले थे, अब मौन क्यों हैं?'

भारत पर 100% टैरिफ लगाने की मांग के बीच सियासत गरमाई; सुप्रिया श्रीनेत का आरोप– 'गोयल का ज्ञान और पीएम का हौसला दोनों गायब, बाहरी दबाव में किया सरेंडर!'

15 Jul 2026  |  2523

 

 

नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक भारी-भरकम आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की खबरों के बीच देश का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। इस मुद्दे को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने सरकार की विदेश नीति, रूस से तेल खरीद और इस पूरे विवाद पर सरकार की 'रहस्यमयी चुप्पी' को लेकर तीखे सवाल दागे हैं। विपक्षी दल का आरोप है कि अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा है, जबकि केंद्र सरकार देश के सामने स्थिति स्पष्ट करने से बच रही है।

"पीयूष गोयल अब मौन क्यों हैं?" — कांग्रेस का सीधा सवाल

कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो मंत्री हर छोटे-बड़े मंच पर अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों को लेकर बढ़-चढ़कर दावे करते थे, आज संकट की इस घड़ी में वो पूरी तरह गायब हैं।

"अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ लगाने की मांग उठ रही है क्योंकि भारत ने रूस से तेल खरीदा। यह मांग खुद ट्रंप के अपने लोग उठा रहे हैं। आखिर भारत की नीतियां कौन तय कर रहा है? पीयूष गोयल लपक-लपक के अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर ज्ञान देते फिरते हैं, तो अब मौन क्यों हैं?" — सुप्रिया श्रीनेत, राष्ट्रीय प्रवक्ता (कांग्रेस)

रूसी तेल खरीद और अमेरिकी रुख पर गंभीर आरोप

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार की कथित 'स्वतंत्र ऊर्जा नीति' महज एक दिखावा साबित हुई है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने के लिए भी पहले अमेरिकी प्रशासन से परोक्ष मंजूरी ली थी, और अब उसी खरीद को लेकर भारत को आर्थिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

सुप्रिया श्रीनेत ने तंज कसते हुए कहा:

"सस्ता रूसी तेल खरीदने के लिए पहले ट्रंप की मंजूरी ली, फिर उनकी परमिशन से खरीदा, और अब खरीदने पर भारी टैरिफ की धमकी मिल रही है। अमेरिका लगातार भारत को निशाना बना रहा है पर मोदी जी तो पूरी तरह से सरेंडर कर चुके हैं। कोई बड़ी ही बात होगी जिसके लिए ब्लैकमेल किए जा रहे हैं! चले थे विश्वगुरु बनने।"

विपक्ष का दावा: विदेश नीति के मोर्चे पर कमजोर साबित हुई सरकार

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विदेश नीति कमजोर दिखाई दे रही है। वैश्विक मंचों पर भारत को लगातार घेरा जा रहा है, लेकिन सरकार इसका प्रभावी और कड़ा जवाब देने में पूरी तरह विफल रही है। पार्टी ने मांग की है कि यदि यह फैसला राष्ट्रीय हित में था, तो सरकार को किसी भी बाहरी दबाव के आगे घुटने टेकने के बजाय मजबूती से अपना रुख साफ करना चाहिए।

सरकार के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती

अमेरिकी टैरिफ की इस मांग और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद अब सबकी नजरें विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं। फिलहाल, केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो भारत-अमेरिका के व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

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