न्यूयॉर्क / नई दिल्ली। अदाणी समूह के चेयरमैन और भारतीय अरबपति गौतम अदाणी ने अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज करने की प्रक्रिया पर एक बड़ा और स्पष्टीकरण भरा हलफनामा दायर किया है। न्यूयॉर्क की एक अदालत के तीखे सवालों का जवाब देते हुए गौतम अदाणी ने साफ तौर पर इनकार किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक आरोपों को खत्म करने के अमेरिकी न्याय विभाग के कदम के पीछे कोई गुप्त वादा, समझौता या कोई बैकडोर डील (समझौता) काम कर रहा था।
कोर्ट के कड़े सवालों पर अदाणी का लिखित जवाब
यह हलफनामा न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी जिला कोर्ट द्वारा बीते 8 जुलाई को जारी किए गए एक आदेश के जवाब में दायर किया गया है। कोर्ट ने गौतम अदाणी से लिखित और शपथ लेकर (Under Oath) यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या उन्हें आरोप पत्र (Indictment) को खारिज करने से जुड़े किसी भी तरह के वादे, ऑफर, सौदेबाजी या समझौते की जानकारी थी।
अपने हलफनामे में गौतम अदाणी ने कोर्ट को आश्वस्त करते हुए कहा:
"मुझे इस मामले को पूरी तरह खारिज करने के संबंध में किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा 'किसी भी चीज का वादा करने, ऑफर देने, मांगने, पाने, सहमति देने या उसे स्वीकार करने' के बारे में रत्ती भर भी जानकारी नहीं थी। मैं इस फैसले से जुड़े किसी भी प्रकार के लेन-देन से पूरी तरह अनभिज्ञ हूँ।"
क्या थे अदाणी पर आरोप?
उल्लेखनीय है कि साल 2024 में तत्कालीन अमेरिकी बाइडेन प्रशासन के दौरान न्याय विभाग ने गौतम अदाणी और सात अन्य लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि भारत में बिजली आपूर्ति के बड़े ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को लगभग 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी। साथ ही, अमेरिकी बाजारों से पूंजी जुटाते समय निवेशकों को गुमराह करने का भी आरोप लगा था। हालांकि, बाद में अमेरिकी न्याय विभाग ने इन आरोपों को खारिज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
10 बिलियन डॉलर के निवेश की अटकलों पर भी रखा पक्ष
अदाणी समूह द्वारा अमेरिका में प्रस्तावित भारी-भरकम निवेश को लेकर बाजार और राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों पर भी गौतम अदाणी ने स्थिति साफ की। कई विश्लेषक इस निवेश को केस खारिज होने की कूटनीतिक डील के तौर पर देख रहे थे।
इस पर अदाणी ने हलफनामे में स्पष्ट किया:
अमेरिका में 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने के अदाणी समूह के इरादे की सार्वजनिक घोषणा 13 नवंबर, 2024 को ही कर दी गई थी।
यह घोषणा अमेरिकी अदालत द्वारा उनके खिलाफ आरोप पत्र (Indictment) सार्वजनिक किए जाने से पहले की गई थी, इसलिए निवेश की योजना का इस कानूनी मामले से कोई संबंध नहीं है।
कानूनी सलाहकारों ने पेश किया था मजबूत पक्ष
हलफनामे के अनुसार, अदाणी के वैश्विक कानूनी सलाहकारों की प्रतिष्ठित फर्म सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी (Sullivan & Cromwell LLP) ने इस मामले में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के आला अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें की थीं। इस दौरान कानूनी टीम ने अदाणी समूह का पक्ष रखते हुए एक विस्तृत श्वेत पत्र (White Paper), विशेषज्ञ रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे थे, जिसके बाद अमेरिकी एजेंसियों ने केस को वापस लेने का कदम उठाया।