कृषि क्षेत्र के लिए गेमचेंजर: भारत-UK व्यापार समझौते से ब्रिटिश बाजार में भारतीय खेती की धाक, किसानों के हित भी सुरक्षित

ब्रिटेन के 90 अरब डॉलर के विशाल बाजार में भारतीय फल, सब्जियों और प्रोसेस्ड फूड को 'शून्य शुल्क' प्रवेश; डेयरी और संवेदनशील फसलों को सुरक्षा कवच।

15 Jul 2026  |  776

 

 

नई दिल्ली।

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ ऐतिहासिक 'व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता' (CETA) भारतीय कृषि क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है। आज से लागू हुए इस समझौते को भारतीय किसानों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इस समझौते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह एक तरफ जहां भारतीय कृषि उत्पादों के लिए ब्रिटेन के दरवाजे पूरी तरह खोल रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश की खाद्य सुरक्षा और छोटे व मध्यम किसानों के हितों की भी चौतरफा घेराबंदी (सुरक्षा) सुनिश्चित करता है।

ब्रिटेन के $90 बिलियन के बाजार में सीधी टक्कर

यूनाइटेड किंगडम हर साल दुनिया भर से लगभग 90 अरब डॉलर (7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) के कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों का आयात करता है। समझौते के तहत ब्रिटेन ने भारतीय कृषि उत्पादों को अपनी मार्केट में ड्यूटी-फ्री (शून्य सीमा शुल्क) एंट्री देने का फैसला किया है। इस ऐतिहासिक रियायत से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में वियतनाम और अन्य बड़े निर्यातक देशों पर सीधी रणनीतिक बढ़त हासिल होगी।

इन भारतीय उत्पादों को मिलेगा सीधा फायदा

ब्रिटिश बाजार में बिना किसी सीमा शुल्क के प्रवेश मिलने से भारत के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा पंख लगेंगे:

ताजे फल और सब्जियां: विशेष रूप से महाराष्ट्र के विश्व प्रसिद्ध ताजे अंगूर, प्याज और मिक्स्ड वेजिटेबल्स।

प्रोसेस्ड फूड (प्रसंस्कृत खाद्य): बेकरी उत्पाद जैसे ब्रेड, पेस्ट्री, केक, इसके अलावा डिब्बाबंद सब्जियां, सॉस और अन्य रेडी-टू-ईट फूड आइटम्स।

अन्य प्रीमियम उत्पाद: प्राकृतिक शहद, जैविक फल और नट्स।

देश के प्रमुख कृषि राज्यों की चमकेगी किस्मत

इस समझौते का सीधा और सबसे बड़ा फायदा भारत के प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों को मिलने जा रहा है।

लाभान्वित होने वाले मुख्य राज्य:

महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब के प्रमुख एग्री-एक्सपोर्ट क्लस्टर्स (कृषि निर्यात केंद्र) इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्यात क्रांति से देश के ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसका सीधा लाभ FPOs (किसान उत्पादक संगठनों), आधुनिक पैकहाउस, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स (परिवहन) सेक्टर को मिलेगा।

डिफेंसिव रुख: भारतीय किसानों के हितों की अभेद्य सुरक्षा

घरेलू कृषि क्षेत्र को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने के लिए भारत सरकार ने बेहद कूटनीतिक और सुरक्षात्मक रुख अपनाया है। देश के छोटे और सीमांत किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस मुक्त व्यापार समझौते की रियायतों से पूरी तरह बाहर (सुरक्षित) रखा गया है। यानी यूके से आने वाले इन उत्पादों पर भारत कोई शुल्क कटौती नहीं देगा।

सुरक्षित रखे गए उत्पाद (नो-कंसेशन लिस्ट)विशेष रूप से वर्जित खाद्य उत्पाद
डेयरी उत्पाद: दूध, पनीर, मक्खन और घीपोल्ट्री व मीट: चिकन और पोर्क
खाद्यान्न और तेल: अनाज, एडिबल ऑयल (खाने का तेल)बुनियादी खाद्य वस्तुएं: चावल और चीनी
चुनिंदा फल: सेब, अनानास, संतरा और अनारसब्जियां: टमाटर, लहसुन, गोभी, मटर और कद्दू

 

इन कड़े सुरक्षा उपायों की वजह से भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आएगी, जबकि भारतीय निर्यातकों को अपनी क्षमता का विस्तार करने का पूरा खुला मैदान मिलेगा।

'आत्मनिर्भर भारत' की ओर बढ़ते कदम

कुल मिलाकर, यह समझौता भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण और किसानों की आय में वृद्धि करने के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न सिर्फ वैश्विक मंच पर भारत की साख मजबूत होगी, बल्कि पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर भारतीय किसान वैश्विक सप्लाई चेन का एक अनिवार्य हिस्सा बन सकेंगे।

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