भोपाल,
मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट में संभावित फेरबदल और बड़े बदलावों की अटकलों के बीच मंगलवार देर रात एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ। सरकार ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए राज्य मंत्री लखन पटेल से 'पशुपालन और डेयरी विकास विभाग' का जिम्मा वापस ले लिया है।
इस हाई-प्रोफाइल फैसले के तुरंत बाद सरकार द्वारा गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया। फिलहाल, यह बेहद महत्वपूर्ण विभाग अब सीधे तौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास रहेगा।
क्या यह 'परफॉर्मेंस रिव्यू' का पहला नतीजा है?
यह कार्रवाई महज कोई प्रशासनिक फेरबदल नहीं मानी जा रही है, बल्कि इसके तार संगठन की समीक्षा से जुड़े हैं। हाल ही में 7 जुलाई को मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने एक विशेष इंटरव्यू में मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा का बड़ा खुलासा किया था।
खंडेलवाल ने बताया था:
"कुछ दिन पहले संगठन और मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से हर मंत्री के विभागीय कामकाज, उनके प्रभाव वाले क्षेत्र और राजनीतिक इलाकों को लेकर विस्तृत चर्चा की थी। हमने यह समीक्षा पूरी कर ली है और इसकी अंतिम रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व (दिल्ली) को सौंप दी है।"
दिल्ली में रिपोर्ट जमा होने के ठीक बाद मंत्री से विभाग वापस लिए जाने को राजनीतिक विश्लेषक आगामी कैबिनेट विस्तार या फेरबदल के पहले कदम के तौर पर देख रहे हैं।
'खराब प्रदर्शन' पर आलाकमान का सख्त रवैया
भले ही सरकार इसे एक रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया बताए, लेकिन संगठन का रुख साफ है। प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने संकेत दिए थे कि जो मंत्री उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं, उन पर आलाकमान की पैनी नजर है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं, मीडिया और आम जनता से लगातार मंत्रियों का फीडबैक मिल रहा है और केंद्रीय नेतृत्व के हरी झंडी दिखाते ही सही समय पर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। लखन पटेल पर हुई यह कार्रवाई इसी सख्त रवैये का नतीजा मानी जा रही है।
क्यों इतना अहम है पशुपालन और डेयरी विभाग?
इस कार्रवाई के मायने इसलिए भी बड़े हैं क्योंकि यह विभाग मध्य प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। दूध उत्पादन, गौ-संरक्षण, गौशालाओं के प्रबंधन और आवारा मवेशियों से जुड़ी नीतियां इसी विभाग के दायरे में आती हैं।
विभाग से जुड़ी बड़ी योजनाएं:
NDDB के साथ करार: हाल ही में मोहन यादव सरकार ने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ हाथ मिलाया है।
बड़ा लक्ष्य: इसका उद्देश्य राज्य में दुग्ध उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाना और डेयरी सहकारी समितियों का बड़े पैमाने पर विस्तार करना है।
निष्कर्ष: इतनी महत्वाकांक्षी योजनाओं के बीच अचानक विभागीय मंत्री को हटाया जाना साफ संदेश देता है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव विकास कार्यों और मंत्रियों के परफॉर्मेंस को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर चल रहे हैं।