'विपक्ष से चर्चा और समर्थन के बिना सरकार नहीं ला सकती यह बिल'— 'वन नेशन वन इलेक्शन' पर केसी वेणुगोपाल का बड़ा बयान

जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी का पलटवार— "यह पीएम मोदी की दूरदर्शी सोच, 2029 से एक साथ चुनाव संभव, बचेंगे ₹7 लाख करोड़!"

16 Jul 2026  |  719

 

 

 

 

नई दिल्ली / लखनऊ: देश में 'एक देश-एक चुनाव' (One Nation One Election) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। जहां एक तरफ केंद्र सरकार और संयुक्त संसदीय समिति (JPC) इस ऐतिहासिक सुधार को देशहित में लागू करने के लिए आम सहमति बनाने में जुटे हैं, वहीं विपक्षी दल इसकी कमियों को रेखांकित करते हुए सरकार को घेर रहे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस के दिग्गज नेता और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार को स्पष्ट नसीहत देते हुए बड़ी बात कही है।

"विपक्ष की राय जाने बिना कैसे आगे बढ़ेगी सरकार?"

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

"विपक्ष के समर्थन के बिना वे (सरकार) यह बिल कैसे ला सकते हैं? उन्हें इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ बैठकर चर्चा करनी होगी। पहले हमें यह पता चलने दीजिए कि वे वास्तव में संसद में क्या लेकर आने वाले हैं, उसके बाद ही हम विस्तृत रूप से अपनी बात सामने रखेंगे।"

लखनऊ में जेपीसी की तीन दिवसीय बैठक संपन्न

दूसरी ओर, 'एक देश-एक चुनाव' से संबंधित संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय अहम बैठक संपन्न हो गई है। समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने बैठक के बाद इस प्रस्तावित कानून का पुरजोर बचाव किया।

“legal experts और देश के शीर्ष अर्थशास्त्रियों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। 'वन नेशन वन इलेक्शन' लागू होने से बार-बार होने वाले चुनावी खर्चों में कमी आएगी और देश की अर्थव्यवस्था को लगभग ₹7 लाख करोड़ का सीधा फायदा होगा।” — पीपी चौधरी, अध्यक्ष, जेपीसी

संसदीय समिति की दलीलें: मुख्य बातें

बिंदुजेपीसी (JPC) का रुख / तर्क
संविधान और फेडरलिज्मयह व्यवस्था संविधान के मूल ढांचे या संघीय ढांचे (Federal Structure) के खिलाफ बिल्कुल नहीं है।
ऐतिहासिक संदर्भवर्ष 1952 से 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ ही होते थे। बाद में राष्ट्रपति शासन और राजनीतिक कारणों से यह चक्र टूट गया।
2029 का लक्ष्ययदि संसद में इस विधेयक को दो-तिहाई बहुमत मिल जाता है, तो 2029 के आम चुनाव से इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
नियमों में बदलावसरकार के अचानक गिरने की स्थिति से निपटने के लिए दलबदल विरोधी कानून और आर्टिकल 85 व 174 में संशोधन पर भी विचार चल रहा है।

बार-बार के चुनाव से रुकता है विकास

जेपीसी अध्यक्ष ने तर्क दिया कि देश का हर हिस्सा हमेशा 'चुनावी मोड' में रहता है, जिससे आदर्श आचार संहिता लागू होते ही विकास कार्य और प्रशासनिक नीतियां ठप हो जाती हैं। इसके अलावा शिक्षकों, पुलिस बलों और सरकारी मशीनरी पर बार-बार चुनाव कराने का अत्यधिक बोझ पड़ता है।

सियासी भविष्य की राह: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कड़े रुख को देखते हुए यह साफ है कि संसद के आगामी सत्रों में इस बिल को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़ा विधायी और राजनीतिक घमासान देखने को मिल सकता है।

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