टीम इंडिया में 'जडेजा युग' का अंत? आगामी वनडे वर्ल्ड कप के लिए अक्षर पटेल बने चयनकर्ताओं की पहली पसंद

210 वनडे मैचों के अनुभवी जडेजा की गिरती फॉर्म पड़ी भारी; बर्मिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ अक्षर के 'सिक्सर' ने पक्का किया नंबर-7 का स्लॉट!

16 Jul 2026  |  842

 

 

नई दिल्ली:

भारतीय क्रिकेट में एक बड़े और कड़े बदलाव की बयार बह रही है। सालों तक अपने बल्ले, गेंद और चीते जैसी फील्डिंग से भारत को कई ऐतिहासिक मैच जिताने वाले दिग्गज ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) शायद अब वनडे क्रिकेट में दोबारा नीली जर्सी में नजर न आएं। 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य चयन समिति ने आगामी वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए अपना रुख पूरी तरह साफ कर लिया है। वे अब जडेजा की जगह युवा ऑलराउंडर अक्षर पटेल (Axar Patel) को टीम के मुख्य स्पिन-बॉलिंग ऑलराउंडर के रूप में आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

1. बर्मिंघम में अक्षर पटेल का 'ऑलराउंडर धमाका'

210 वनडे मैचों का अनुभव रखने वाले जडेजा के इस सफर पर ब्रेक लगने की सबसे बड़ी वजह अक्षर पटेल का लगातार निखरता प्रदर्शन है। इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम वनडे में अक्षर ने अकेले दम पर महफिल लूट ली:

सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी: अक्षर ने इंग्लिश बल्लेबाजों को अपनी फिरकी पर नचाते हुए 62 रन देकर 4 विकेट चटकाए, जो उनके वनडे करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

मैच जिताऊ अर्धशतक: गेंदबाजी के बाद संकट के समय उन्होंने सूझबूझ से बल्लेबाजी करते हुए नाबाद अर्धशतक जड़ा और भारत को 6 विकेट से आसान जीत दिलाकर 'प्लेयर ऑफ द मैच' बने।

2. क्यों पीछे छूट गए 'सर जडेजा'?

रिपोर्ट के अनुसार, चयनकर्ता अब जडेजा को वनडे प्रारूप में पहली पसंद का स्पिनर नहीं मान रहे हैं। बीसीसीआई (BCCI) के एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:

"सीमित ओवरों के क्रिकेट में जडेजा की गेंदबाजी काफी समय से धारहीन रही है। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भी उन्हें सिर्फ इसलिए मौका मिला था क्योंकि दुबई की पिचें स्पिन-अनुकूल थीं। इसके अलावा, 2019 वर्ल्ड कप जैसी उनकी आक्रामक पावर-हिटिंग और फिनिशिंग क्षमता पर भी अब उम्र और फॉर्म का असर दिखने लगा है।"

न्यूजीलैंड सीरीज के निराशाजनक आंकड़े:

जडेजा का हालिया फॉर्म उनके कद के मुताबिक नहीं रहा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में जडेजा के बल्ले से महज 43 रन निकले। इस दौरान उनका औसत 14.33 और स्ट्राइक रेट केवल 66.15 का रहा, जो आधुनिक वनडे क्रिकेट के मानकों से काफी धीमा है।

3. कुलदीप यादव की बेबसी और टीम का नया कॉम्बिनेशन

भारतीय टीम प्रबंधन ने विदेशी पिचों पर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वर्तमान इंग्लैंड दौरे पर भारत बिना किसी विशेषज्ञ फ्रंटलाइन स्पिनर के मैदान पर उतर रहा है।

बल्लेबाजी की कमी पड़ी भारी: बेहतरीन फॉर्म में होने के बावजूद 'चाइनामैन' गेंदबाज कुलदीप यादव को लगातार बेंच पर बैठना पड़ रहा है, क्योंकि वह निचले क्रम में बल्लेबाजी का विकल्प नहीं देते।

नया स्पिन विभाग: कप्तान और कोच को नंबर-7 पर एक ऐसा खिलाड़ी चाहिए जो कोटे के ओवर फेंकने के साथ मैच फिनिश कर सके। यही वजह है कि अब स्पिन विभाग का दारोमदार अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर की युवा ऑलराउंड जोड़ी के कंधों पर सौंप दिया गया है।

अक्षर पटेल के सामने भी हैं बड़ी चुनौतियां

यद्यपि चयनकर्ता अक्षर पर दांव खेल रहे हैं, लेकिन उनके सामने भी आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है:

परिस्थितियांअक्षर पटेल का प्रदर्शन / चुनौती
स्पिन-अनुकूल पिचेंबेहतरीन प्रदर्शन, बर्मिंघम में 4 विकेट और नाबाद अर्धशतक।
तेज और उछालभरी पिचेंदक्षिण अफ्रीका जैसी पिचों पर संघर्ष। वहां 3 मैचों में केवल 8 रन और महज 1 विकेट।
आगामी परीक्षाविश्व कप में विदेशी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खुद को ढालना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

निष्कर्ष:

भारतीय क्रिकेट का इतिहास गवाह है कि बड़े टूर्नामेंट्स से पहले हमेशा कड़े फैसले लिए जाते हैं। रवींद्र जडेजा ने भारतीय क्रिकेट को जो दिया है, उसकी भरपाई नामुमकिन है। लेकिन भविष्य की जरूरतों और टीम संतुलन को देखते हुए, ऐसा लगता है कि भारतीय थिंक टैंक अब 'जडेजा युग' से आगे बढ़कर अक्षर पटेल के रूप में अपनी नई उम्मीदें तलाश रहा है।

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