ईरान में तख्तापलट का साया: अमेरिका से समझौते पर भड़के कट्टरपंथी, राष्ट्रपति पजशकियान को सरेआम 'गला काटने' की धमकी

खामेनेई के जनाजे में विदेश मंत्री पर चले पत्थर; नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा के पर्दे के पीछे रहने से गहराया सत्ता का आंतरिक संघर्ष।

19 Jul 2026  |  1262

 

 

 

तेहरान। बाहरी मोर्चे पर अमेरिका के साथ जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच अब ईरान के भीतर एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते को लेकर ईरान के कट्टरपंथी गुट पूरी तरह भड़क गए हैं। सीएनएन (CNN) की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथियों ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और प्रमुख नेताओं पर इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ 'सॉफ्ट तख्तापलट' (Soft Coup) की साजिश रचने का संगीन आरोप लगाया है।

कट्टरपंथियों का दावा है कि ये नेता नए सुप्रीम लीडर को दरकिनार कर पूरी सत्ता अपने हाथों में लेने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान के अंदर यह आंतरिक गृहयुद्ध जैसे हालात ऐसे समय में बने हैं, जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमले लगातार तेज हो रहे हैं।

खामेनेई के अंतिम संस्कार में फूटा गुस्सा, लगे 'गद्दार' के नारे

यह आंतरिक तनाव उस समय खुलकर सामने आ गया, जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के शुरुआती हमलों में मारे गए पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली गई।

नेताओं पर हमला: जब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब कट्टरपंथी समर्थकों की भीड़ ने 'समझौता करने वालों की मौत हो' के नारे लगाए।

विदेश मंत्री पर पत्थरबाजी: भीड़ ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर न केवल पत्थर फेंके, बल्कि उन्हें 'देश बेचने वाला गद्दार' भी कहा।

सरेआम मौत की धमकी: ईरानी शासन से जुड़े एक प्रभावशाली धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति पजशकियान को खुली चुनौती देते हुए कहा, "राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।"

कट्टरपंथी गुटों के गंभीर आरोप: क्यों सुलग रहा है ईरान?

कट्टरपंथियों के गुस्से और तख्तापलट के आरोपों के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण हैं:

खामेनेई की मौत का बदला न लेना: कट्टरपंथियों का मानना है कि सरकार को अमेरिका से बातचीत करने के बजाय खामेनेई की मौत का सैन्य बदला लेना चाहिए था।

मुज्तबा खामेनेई की अनदेखी: आरोप है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर और खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई की इच्छा के खिलाफ किया गया है।

संसद का निलंबन: सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाते हुए संसद को निलंबित करने और रात में होने वाली सरकार विरोधी रैलियों को बलपूर्वक रोकने के आरोप लगे हैं।

सांसद ने जताई तख्तापलट की आशंका: ईरान के कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जनता को आगाह करते हुए लिखा, "ईरान की जनता सावधान रहे, क्या देश में तख्तापलट होने वाला है? हम खामेनेई के खून का बदला लेने के लिए खड़े हैं और इस साजिश के खिलाफ लड़ेंगे।"

पर्दे के पीछे मुज्तबा खामेनेई: सत्ता के वैक्यूम का फायदा?

ईरान मामलों के विशेषज्ञ और मशहूर किताब ‘What Iranians Want’ के लेखक अराश अजीजी ने सीएनएन (CNN) को बताया कि इस पूरे विवाद की जड़ नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई का सामने न आना है।

मुज्तबा अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और न ही उन्होंने देश को संबोधित किया है। उनकी इस रहस्यमयी चुप्पी के कारण संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति पेजेशकियन और विदेश मंत्री अराघची ही इस समय सरकार का वास्तविक चेहरा बने हुए हैं। कट्टरपंथियों की पहुंच मुज्तबा तक नहीं हो पा रही है, जिसके कारण वे अग्रिम पंक्ति के इन नेताओं पर ही देश के साथ गद्दारी और सत्ता हथियाने का आरोप लगा रहे हैं।

परमाणु संपन्न होने की दहलीज पर खड़े ईरान के भीतर का यह गृहयुद्ध पश्चिम एशिया के संकट को और ज्यादा भयावह बना सकता है।

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