चौतरफा संकट में पाकिस्तान: बलूचिस्तान, POK और KPK में बगावत; आतंक के 'पुराने नुस्खे' पर लौटे जनरल मुनीर

तालिबान और बलूच विद्रोहियों को दबाने के लिए ISKP को शह? संयुक्त राष्ट्र ने जताई POK पर चिंता, चीन का दबाव भी बढ़ा!

20 Jul 2026  |  1144

 

 

इस्लामाबाद/नई दिल्ली,

पड़ोसी देश पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे गंभीर सुरक्षा और प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है। बलूचिस्तान में जारी उग्रवादी विद्रोह, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में व्यापक जन-आक्रोश और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खूनी हमलों ने शहबाज सरकार और सैन्य नेतृत्व की नींद उड़ा दी है।

इस चौतरफा घिराव से निपटने के लिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर एक बार फिर उसी पुरानी आत्मघाती रणनीति पर लौटते दिख रहे हैं, जिसके तहत आतंकी प्रॉक्सी को पालना, उनका इस्तेमाल करना और वैश्विक मंच पर वैधता बनाए रखने के लिए दिखावे की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई करना शामिल है।

तालिबान के खिलाफ 'ISKP' को संरक्षण देने का आरोप

तंजानिया के प्रतिष्ठित मीडिया आउटलेट 'द सिटिजन' की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान अब तालिबान और बलूच विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISIS-K या ISKP) को गुप्त संरक्षण दे रहा है। 30 जून को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हुई सीमा पार संदिग्ध गतिविधियों में भी ISKP के ठिकानों की संलिप्तता सामने आई थी। कतर, तुर्की और चीन जैसे देशों द्वारा मध्यस्थता के तमाम प्रयासों के बावजूद TTP पिछले एक साल में पाकिस्तान के भीतर 1,000 से अधिक हमलों को अंजाम दे चुका है, जिसमें सैकड़ों सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।

POK में अशांति की लहर: संयुक्त राष्ट्र ने दिए जांच के आदेश

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र (UN) की मानवाधिकार एजेंसी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में जारी हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। POK में आगामी 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले जून से लेकर अब तक दर्जनों प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों की मौत हो चुकी है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने जिनेवा में बयान जारी कर अशांति के दौरान हुई सभी मौतों की त्वरित, गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है।

CPEC पर मंडराया खतरा, बीजिंग का भारी दबाव

बलूचिस्तान में अलगाववादी विद्रोहियों ने न केवल पाकिस्तानी सेना बल्कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत चल रही चीनी परियोजनाओं को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग ने अपने नागरिकों और अरबों डॉलर के निवेश की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। इस दबाव के चलते जनरल मुनीर ने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में दमनकारी नीतियां अपनाई हैं, जिसने स्थानीय पश्तून और बलूच आबादी को देश से और ज्यादा अलग-थलग कर दिया है।

विशेषज्ञ की राय: "सहमति के बजाय पाशविक बल से शासन"

रणनीतिक मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस संकट का विश्लेषण करते हुए लिखा:

"POK में जो विरोध प्रदर्शन आर्थिक शिकायतों को लेकर शुरू हुए थे, वे अब स्वायत्तता के व्यापक आंदोलन में बदल चुके हैं। वहीं बलूचिस्तान का विद्रोह अब चीनी निवेश को डराकर पाकिस्तान की आर्थिक जीवन रेखा के लिए खतरा बन गया है। यह संकट दिखाता है कि पाकिस्तान लोगों की सहमति के बजाय केवल पाशविक सैन्य बल (Brute Force) के दम पर शासन करना चाहता है, जिसकी अपनी सीमाएं हैं।"

सुरक्षा-प्रथम दृष्टिकोण की विफलता

गहराते आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र जनता की जायज राजनीतिक और सामाजिक मांगों को सुनने के बजाय सीमावर्ती क्षेत्रों में क्रूरतापूर्ण सैन्य कार्रवाई कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे खतरनाक अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के साथ पर्दे के पीछे नए रिश्ते जोड़कर आग से खेलने की यह पुरानी चाल पाकिस्तान को और गहरे दलदल में धकेल सकती है।

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