रूस-यूक्रेन युद्ध में महाविनाश: कीव पर 41 मिसाइलें और 125 ड्रोन दागे, ब्लैक सी में रूसी तेल टैंकरों पर यूक्रेन का भीषण पलटवार

हवाई हमलों से दहली यूक्रेन की राजधानी, पांच जिलों में भयंकर आग; उधर रूस के 'शैडो फ्लीट' पर यूक्रेन का बड़ा प्रहार, कजाकिस्तान की तेल सप्लाई रुकी!

20 Jul 2026  |  1172

 

 

कीव/मॉस्को, 

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब तक के सबसे विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। रविवार की रात रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव सहित कई शहरों पर 41 मिसाइलों और 125 घातक ड्रोन से भीषण हमला बोल दिया। रात करीब 1:30 बजे शुरू हुआ यह तांडव कई घंटों तक जारी रहा, जिससे पूरा कीव धमाकों की गूंज से दहल उठा। इस सामूहिक बमबारी में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए।

यूक्रेन की स्टेट इमरजेंसी सर्विस के अनुसार, कीव के पांच बड़े जिलों में इस हमले के बाद भीषण आग लग गई, जिससे कई रिहायशी इमारतें, दफ़्तर, औद्योगिक साइटें और एक डॉरमिटरी (छात्रावास) मलबे में तब्दील हो गए। स्वियातोशिंस्की और शेवचेंकिव्स्की जिलों में जलती हुई इमारतों से लोगों को निकालने के लिए बचाव दल को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

ट्रंप का बड़ा ऐलान: यूक्रेन में ही बनेंगी 'पैट्रियट' मिसाइलें

इस भीषण हमले ने एक बार फिर यूक्रेन में अमेरिका निर्मित 'पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम' की भारी कमी को उजागर किया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव की घोषणा करते हुए कहा है कि वह यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल सिस्टम बनाने का लाइसेंस देने के लिए तैयार हैं। हालांकि, इसके पूरी तरह अमल में आने में कई साल लग सकते हैं। पैट्रियट को रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का सबसे अचूक हथियार माना जाता है।

रूस का दावा: सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

उधर, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उन्होंने कीव में केवल सैन्य और दोहरे इस्तेमाल वाली संपत्तियों को निशाना बनाया है। इनमें फ्लेमिंगो ड्रोन और नेपच्यून गाइडेड मिसाइल के कल्पुर्जे बनाने वाले प्लांट, और ड्रोन व इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर इक्विपमेंट को असेंबल करने वाला एक पोस्टल टर्मिनल शामिल है। इसके अलावा, यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्कीव के पास एक डाक केंद्र पर हुए रूसी हमले में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि खेरसॉन और सुमी में भी गाइडेड बमों से तबाही मची है।

ब्लैक सी में यूक्रेन का पलटवार: रूस के 'शैडो फ्लीट' पर सर्जिकल स्ट्राइक

जमीन पर मची तबाही के बीच यूक्रेन ने समुद्र और रूसी सरजमीं के भीतर रूस की आर्थिक रीढ़ यानी उसके तेल उद्योग पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है।

1. रूसी तट पर तेल टैंकरों में लगी आग

कैस्पीयम पाइपलाइन कंसोर्टियम (CPC) के मुताबिक, ब्लैक सी (काला सागर) के पास नोवोरोसिस्क बंदरगाह पर रूस के मुख्य टर्मिनल पर दो बड़े तेल टैंकरों (ASIA और NISSOS) पर ड्रोन हमले किए गए। इस हमले के कारण 'ASIA' नामक टैंकर में भीषण आग लग गई, जिसे बाद में बुझाया गया। इस हमले के बाद टर्मिनल पर तेल की लोडिंग पूरी तरह रोक दी गई है।

2. कजाकिस्तान की तेल सप्लाई प्रभावित

यह हमला रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह 1,510 किलोमीटर लंबी सीपीसी पाइपलाइन कजाकिस्तान के तेल को दुनिया भर के बाजारों में भेजती है। कजाकिस्तान के कुल कच्चे तेल के निर्यात में इस पाइपलाइन की 80% हिस्सेदारी है, और इस पूरे उद्यम में रूसी सरकार व उसकी कंपनियों की 31% हिस्सेदारी है। इस हमले से वैश्विक तेल बाजार में भी हड़कंप मच गया है।

3. स्टावरोपोल में 3 ऑयल डिपो तबाह

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रविवार को एलान किया कि उनकी सुरक्षा सेवा (SBU) की यूनिट्स ने रूसी इलाके स्टावरोपोल में तीन ऑयल डिपो और एक फ्यूल फैसिलिटी को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। रूसी न्यूज़ आउटलेट ‘एस्ट्रा’ ने भी वीडियो और तस्वीरों के आधार पर तीन ऑयल डिपो में आग लगने की पुष्टि की है।

रूस के 'शैडो फ्लीट' पर वार क्यों?

यूक्रेन का कहना है कि रूस अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करके अपने 'शैडो फ्लीट' (गुप्त जहाजी बेड़े) के जरिए तेल का अवैध निर्यात कर रहा है, जिससे क्रेमलिन को युद्ध के लिए फंडिंग मिलती है। इसी को रोकने के लिए यूक्रेन ने ब्लैक और अजोव सी में रूसी जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे रूस में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है।

रूस ने मार गिराए 140 यूक्रेनी ड्रोन

रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने रविवार रात भर में आठ रूसी इलाकों, क्रीमिया और ब्लैक सी के ऊपर 140 यूक्रेनी ड्रोन्स को मार गिराया है। हालांकि, यूक्रेन की सीमा के पास रूसी इलाके कुर्स्क में ड्रोन हमलों के कारण चार अपार्टमेंट बिल्डिंग्स में आग लग गई, जिसमें एक नागरिक घायल हुआ है। फिलहाल दोनों देशों के बीच यह जंग जमीन से लेकर आसमान और समंदर तक महाविनाश का रूप ले चुकी है।

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