नई दिल्ली / तेल अवीव:
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने दावा किया है कि ईरान पर्दे के पीछे अपने परमाणु कार्यक्रम को नए सिरे से शुरू करने की फिराक में है। इजरायली खुफिया एजेंसी 'मोसाद' के अनुसार, तेहरान ने अपने यूरेनियम एनरिचमेंट (संवर्धन) में इस्तेमाल होने वाले उन्नत सेंट्रीफ्यूज को 'पिकएक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) की बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड सुरंगों में स्थानांतरित कर दिया है।
आशंका जताई जा रही है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और हमलों के खतरे से बचने के लिए ईरान इसी अभेद्य ठिकाने से अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा सक्रिय कर सकता है।
अमेरिकी मीडिया का बड़ा खुलासा: 12 दिनों के संघर्ष के बाद बदला ठिकाना
अमेरिकी समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिनों के सैन्य संघर्ष के तुरंत बाद तेहरान ने अपने सेंट्रीफ्यूज को पिकएक्स माउंटेन के नीचे बनी गहरी सुरंगों में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया था। इजरायल ने इस संबंध में विस्तृत खुफिया जानकारी अमेरिकी प्रशासन के साथ भी साझा की है।
आखिर क्या है 'पिकएक्स माउंटेन'?
'पिकएक्स माउंटेन' (जिसे local स्तर पर माउंट कोलांग भी कहा जाता है) ईरान के नतांज यूरेनियम एनरिचमेंट सेंटर के पास स्थित एक विशाल और बेहद सुरक्षित भूमिगत परिसर है।
अभेद्य सुरक्षा: कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिसर पहाड़ों की इतनी गहराई में स्थित है कि अमेरिका के सबसे शक्तिशाली 'बंकर-बस्टर' बम भी इसे पूरी तरह तबाह नहीं कर सकते।
तबाही के बाद विकल्प: 2020 में नतांज स्थित अंडरग्राउंड असेंबली सेंटर में हुए रहस्यमयी विस्फोट के बाद ईरान ने पिकएक्स माउंटेन को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में विकसित किया था।
सैटेलाइट तस्वीरों से बढ़ी हलचल, ट्रकों की आवाजाही जारी
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिकएक्स माउंटेन क्षेत्र में हाल के महीनों में भारी कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी और ट्रकों की आवाजाही दर्ज की गई है।
तस्वीरों से संकेत मिलते हैं कि सुरंगों के नेटवर्क को और मजबूत किया जा रहा है। इजरायली अधिकारियों को अंदेशा है कि ईरान यहां एक छोटा लेकिन अत्यधिक प्रभावी और गुप्त यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट स्थापित कर सकता है।
सेंट्रीफ्यूज की भूमिका और ईरान का रुख
सेंट्रीफ्यूज क्या हैं?
सेंट्रीफ्यूज वे मशीनें हैं जो यूरेनियम गैस को अत्यधिक गति से घुमाकर उसके आइसोटोप अलग करती हैं। इसका इस्तेमाल नागरिक ऊर्जा जरूरतों (कम संवर्धन) से लेकर परमाणु हथियार (अत्यधिक संवर्धन) बनाने तक में होता है।
ईरान का पक्ष:
दूसरी ओर, ईरान इन तमाम आरोपों को खारिज करता रहा है। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा अनुसंधान जैसे पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका कोई परमाणु हथियार बनाने का इरादा नहीं है।
बहरहाल, पश्चिमी देशों और इजरायल की बढ़ती चिंताओं ने इस मुद्दे को वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से एक बार फिर बेहद संवेदनशील बना दिया है।