काबुल / बदख्शां:
अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद से लगभग पूरे देश पर एकाधिकार बनाए रखने वाले तालिबान के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। उत्तर-पूर्वी प्रांत बदख्शां के याफ्ताल-ए-पायीन (Yaftal-e-Payeen) जिले से सामने आई एक घटना ने तालिबान के सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 17 जुलाई की सुबह हथियारबंद तालिबान विरोधी लड़ाकों ने जिला मुख्यालय पर अचानक धावा बोलकर तालिबान सुरक्षाबलों को निशस्त्र कर दिया और प्रशासनिक भवन पर अपना झंडा फहरा दिया। 2021 के बाद यह पहला मौका है जब किसी विद्रोही गुट ने किसी जिला मुख्यालय पर कब्जा करने का सार्वजनिक दावा किया है।
तालिबान का पलटवार: "कुछ ही घंटों में बहाल हुआ नियंत्रण"
घटना के तुरंत बाद बदख्शां पहुंचे तालिबान सेना प्रमुख कारी फसीहुद्दीन फितरत ने इस पूरे घटनाक्रम को खारिज करते हुए इसे महज एक 'पब्लिसिटी स्टंट' करार दिया।
तालिबान प्रशासन के मुताबिक:
सुरक्षा बलों ने कुछ ही घंटों के भीतर इलाके पर दोबारा अपना पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया।
घटना में शामिल कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने पूछताछ में खुद को नए संगठन का हिस्सा स्वीकार किया है।
तालिबान का कहना है कि ऐसे छोटे-छोटे गुट केवल सोशल मीडिया पर प्रचार पाने के लिए झंडे फहराने जैसी हरकतें करते हैं और उनमें सुरक्षा बलों का मुकाबला करने की ताकत नहीं है।
कौन है नया संगठन 'सिपाहियान-ए-मिहान'?
हमले के साथ ही पहली बार 'सिपाहियान-ए-मिहान' (Soldiers of the Homeland / मातृभूमि के सैनिक) नामक नए सशस्त्र संगठन का नाम सामने आया है।
संगठन का नेतृत्व: बीबीसी उर्दू व अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, इस संगठन की कमान कय्यूम खान मलंग (असली नाम: अब्दुल कय्यूम शिकारी) के हाथों में है। वह पूर्व अमेरिकी समर्थित अफगान नेशनल आर्मी का हिस्सा रह चुका है और अमेरिकी डेल्टा फोर्स के साथ अभियानों में शामिल रहा है।
पृष्ठभूमि: कय्यूम पहले अहमद मसूद के 'नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट' (NRF) से जुड़ा था, लेकिन बाद में वैचारिक मतभेदों के चलते अलग होकर उसने बदख्शां में अपना स्वतंत्र संगठन बना लिया।
प्रतीक चिन्ह: संगठन के प्रतीक चिन्ह में सिमुर्ग, सूर्य, हिंदूकुश पर्वत, लैपिस लाजुली, तलवार और सितारों जैसे सांस्कृतिक व ऐतिहासिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है।
बदख्शां की रणनीतिक अहमियत
बदख्शां अफगानिस्तान का एक अति-संवेदनशील और रणनीतिक प्रांत है:
अंतरराष्ट्रीय सीमाएं: इसकी सीमाएं ताजिकिस्तान, चीन और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान से लगती हैं।
वाखान कॉरिडोर: चीन को अफगानिस्तान से जोड़ने वाला ऐतिहासिक वाखान कॉरिडोर इसी क्षेत्र में है।
पंजशीर से नजदीकी: यह क्षेत्र पंजशीर घाटी के करीब है, जो ऐतिहासिक रूप से तालिबान विरोधी ताकतों का मजबूत गढ़ रहा है।
अफगानिस्तान के शक्ति संतुलन पर क्या होगा असर?
हालांकि इस घटना से काबुल में तालिबान की केंद्रीय सत्ता को तत्काल कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आता, क्योंकि जिला मुख्यालय पर दावे की स्थिति महज कुछ घंटों ही टिक सकी।
फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि तालिबान के कड़े शासन के बावजूद स्थानीय स्तर पर असंतोष और छोटे सशस्त्र गुटों की मौजूदगी कायम है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 'सिपाहियान-ए-मिहान' एक सीमित स्थानीय समूह बना रहता है या फिर अन्य तालिबान विरोधी गुटों के साथ हाथ मिलाकर अपनी गतिविधियों का दायरा बढ़ाता है।