डिजिटल क्रांति या बच्चों की सुरक्षा? 15 से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने वाला फ्रांस बना पहला ईयू देश

"डिजिटल दुनिया के खतरों पर कड़ा प्रहार: अब बिना उम्र की पुष्टि नहीं खुलेंगे सोशल मीडिया अकाउंट, जानिए क्या है मैक्रों सरकार का मास्टर प्लान।"

22 Jul 2026  |  837

 

पेरिस:

बढ़ते डिजिटल स्क्रीन-टाइम और ऑनलाइन खतरों से बच्चों को सुरक्षित रखने की दिशा में फ्रांस ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने वाला फ्रांस यूरोपीय संघ (EU) का पहला देश बन गया है। फ्रांसीसी संसद ने बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए इस कड़े कानून को अपनी मंजूरी दे दी है।

संसद में भारी बहुमत से पास हुआ विधेयक

मंगलवार को फ्रांसीसी सीनेट से हरी झंडी मिलने के बाद नेशनल असेंबली में इस विधेयक पर मतदान हुआ, जहाँ इसके पक्ष में 279 और विरोध में महज 81 वोट पड़े।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कानून का कड़ा समर्थन किया था। संसद से मिली मंजूरी का स्वागत करते हुए उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा:

"बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के मामले में फ्रांस अब पूरे यूरोप में सबसे आगे खड़ा है। यह हमारे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव है।"

राष्ट्रपति मैक्रों की योजना इस कानून को 1 सितंबर से लागू करने की है, ताकि देश के नए शैक्षणिक सत्र (Academic Session) की शुरुआत के साथ ही इसे प्रभावी बनाया जा सके।

कानून के मुख्य प्रावधान: कब और कैसे लागू होंगी पाबंदियाँ?

नए अकाउंट्स पर तुरंत रोक: सितंबर से 15 साल से कम उम्र के बच्चे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नया अकाउंट नहीं बना सकेंगे।

पुराने अकाउंट्स होंगे बंद: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के मौजूदा अकाउंट्स को जनवरी 2027 तक पूरी तरह से निष्क्रिय (Deactivate) कर दिया जाएगा।

उम्र सत्यापन अनिवार्य: अब सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यूजर्स की सही उम्र की पुष्टि (Age Verification) करना कानूनन अनिवार्य होगा।

इन सेवाओं को छूट: शैक्षणिक वेबसाइट्स, ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया और साइंटिफिक प्लेटफॉर्म्स को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।

कोई आपराधिक दंड नहीं: कानून में बच्चों या उनके माता-पिता के लिए किसी प्रकार की सजा का प्रावधान नहीं है; पूरी जवाबदेही टेक कंपनियों की होगी।

टेक कंपनियों पर जिम्मेदारी, डेटा रहेगा सुरक्षित

फ्रांस की डिजिटल मंत्री ऐनी ले हेनानफ ने स्पष्ट किया कि कानून को लागू करने की समय-सीमा पूरी तरह से व्यावहारिक है, क्योंकि उम्र की पुष्टि करने वाली तकनीकें पहले से उपलब्ध हैं और नए टूल्स विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया के दौरान आम यूजर्स की गोपनीयता (Personal Data) से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, यूरोपीय कमीशन अभी यह समीक्षा करेगा कि क्या यह कानून ईयू के 'डिजिटल सर्विसेज एक्ट' के नियमों के अनुरूप है।

क्यों पड़ी इस कड़े कानून की जरूरत?

यह फैसला युवा पीढ़ी पर सोशल मीडिया के पड़ रहे नकारात्मक मानसिक और शारीरिक प्रभाव की चिंताओं के बाद लिया गया है। फ्रांस की पब्लिक हेल्थ वॉचडॉग की रिपोर्ट के अनुसार:

90% किशोर ऑनलाइन: 12 से 17 साल की उम्र के लगभग 90 प्रतिशत बच्चे प्रतिदिन स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं।

स्क्रीन टाइम की चिंता: हर दो में से एक टीनएजर रोजाना 2 से 5 घंटे स्मार्टफोन पर बिताता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर: टिकटॉक, स्नैपचैट और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स का किशोरों—विशेषकर लड़कियों—के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा बुरा असर पड़ रहा है।

फ्रांस के इस कदम के बाद अब दुनिया के अन्य देशों पर भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया को लेकर कड़े नियम बनाने का दबाव बढ़ेगा।

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