इम्फाल:
मणिपुर में जारी हिंसा और तनाव के बीच तंगखुल नगा छात्र संघ और सिविल सोसाइटी संगठनों ने भारत सरकार एवं राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने भारत-म्यांमार सीमा के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले नगा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, तो वे चीन समेत अन्य पड़ोसी देशों से मदद मांगने पर मजबूर हो जाएंगे।
'तंग आ चुके हैं नगा नागरिक'
इम्फाल में तांगखुल अजे कतमनाओ लॉन्ग (TAKL) यानी 'सदर्न तांगखुल स्टूडेंट्स यूनियन' के अध्यक्ष यारचूइसो काशुंग ने मीडिया को संबोधित करते हुए अपनी लाचारी और नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "इस मोड़ पर हम बेहद थक चुके हैं। अगर मणिपुर सरकार और भारत सरकार मूल निवासियों, विशेषकर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा करने में असमर्थ या अनिच्छुक हैं, तो लोगों के पास चीन जैसे पड़ोसी देशों का रुख करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।"
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मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग
नगा नागरिकों की सुरक्षा में विफलता का आरोप लगाते हुए काशुंग ने राज्य के मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "यदि मुख्यमंत्री राज्य और वहां के नागरिकों की रक्षा करने में असमर्थ हैं, तो उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।"
अलगाव की गहरी होती भावना
सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों में पनप रही उपेक्षा और अलगाव की भावना को उजागर करते हुए काशुंग ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की अनदेखी के कारण सीमाई इलाकों के निवासियों को लगता है कि वे न तो मणिपुर का हिस्सा हैं और न ही भारत का।
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हालिया हत्याओं पर मांगा जवाब
नगा-कुकी-जो संघर्ष के बीच हाल ही में तामेंगलोंग, सेनापति और कामजोंग में हुई नगा नागरिकों की हत्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। इन घटनाओं में 17 वर्षीय लियांगमेई नगा युवक, तीन माओ नगा नागरिक और पिलोंग में चार तांगखुल नगा नागरिकों की जान चली गई थी।
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