स्पेशल डेस्क, पटना। गांधी जयंती के पावन अवसर पर बिहार सरकार ने जेलों में एक अनूठी और मानवीय पहल की है। राज्य की जेलों में सजा काट रहे कैदियों की मेहनत से अर्जित कमाई का एक-तिहाई हिस्सा उन पीड़ित परिवारों के बीच वितरित किया जा रहा है, जिन्होंने अपराध का दंश झेला है। इस योजना के तहत कुल 1,820 पीड़ित परिवारों के बैंक खातों में 3.86 करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए जा रहे हैं।

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कैदियों की मेहनत, पीड़ितों को राहत

हत्या, अपहरण, दहेज उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों की सजा काट रहे कैदी जेलों में फर्नीचर, मसाले, तेल, सत्तू बनाने, बागवानी, खाना पकाने और प्रिंटिंग प्रेस जैसे कामों में लगे हैं। श्रम संसाधन विभाग की तय दरों पर मिलने वाले पारिश्रमिक का एक-तिहाई हिस्सा 'अपराध पीड़ित कल्याण न्यास' में जमा किया जाता है। इसी राशि को संबंधित जिलाधिकारियों के माध्यम से पीड़ितों के खातों में भेजा जा रहा है।

  • सर्वाधिक राशि जुटाने वाली जेलें: 59.41 लाख रुपये के साथ मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल सबसे आगे रही। बक्सर जेल ने 44.87 लाख और पूर्णिया जेल ने 36.49 लाख रुपये जुटाए।
  • प्रमुख पीड़िताएं: अपने स्वजन की हत्या का दर्द झेल रहीं चनिया देवी को सर्वाधिक 1.69 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा सरस्वती देवी (1.64 लाख), कुढ़न देवी (1.48 लाख), मीना देवी (1.32 लाख) और सोना बान खातून (1.05 लाख) को भी प्रमुख रूप से वित्तीय सहायता मिल रही है।

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मानवीय आधार पर 44 वृद्ध और बीमार बंदियों की रिहाई

इसी अवसर पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्ध, गंभीर रूप से बीमार और न्यूनतम 14 वर्ष की सजा काट चुके 44 कैदियों को रिहा किया जा रहा है। रिहा होने वाले कैदियों में सबसे बुजुर्ग 93 वर्षीय रामवृक्ष कोइरी (बक्सर सेंट्रल जेल) शामिल हैं, जिन्होंने साढ़े 17 साल की सजा पूरी की है। इनके अलावा 21 सालों से बंद महिला कैदी कुंभिया देवी, योगेश्वर यादव (84 वर्ष) और हरिवंश राम (84 वर्ष) को भी मानवीय दृष्टिकोण से नया जीवन शुरू करने का अवसर दिया गया है।

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