SIR को लेकर जारी बहस के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आलोचकों को करारा जवाब दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से दीपके ने संगठन की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर अपना रुख स्पष्ट किया।

"बदनाम करने वालों से उलझना बेकार"

अभिजीत दीपके ने कहा कि CJP की छवि खराब करने की कोशिश करने वालों को लेकर उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन वह अपनी ऊर्जा इस तरह की व्यर्थ बहसों में खर्च नहीं करना चाहते।

"उन लोगों से लड़ने में समय और ऊर्जा गंवाने का कोई मतलब नहीं है, जो पहले ही CJP को बदनाम करने का मन बना चुके हैं। हमारा मुख्य ध्यान उन युवाओं और उनके वास्तविक मुद्दों पर होना चाहिए, जिनकी आवाज बनने का हमने बीड़ा उठाया है।" — अभिजीत दीपके, संस्थापक (CJP)

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स्थापित राजनीतिक दलों पर साधा निशाना

राजनीतिक व्यवस्था पर तंज कसते हुए दीपके ने कहा कि आज देश का एक बड़ा युवा वर्ग राजनीतिक दलों के बीच चलने वाली आपसी खींचतान से पूरी तरह परेशान हो चुका है। उन्होंने कहा कि स्थापित दल जिन लोगों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं, उनकी बुनियादी समस्याओं को सुलझाने के बजाय अपनी राजनीतिक अहमियत बढ़ाने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं।

CJP के गठन के संदर्भ में उन्होंने इसे एक "बड़ा इत्तेफाक" बताया, जिसने लाखों युवाओं को एक नई उम्मीद दी है।

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CJP का हालिया रुख और अभियान

  • SIR एवं चुनाव आयोग का विरोध: CJP चुनावी प्रक्रिया और SIR व्यवस्था को लेकर लगातार मुखर रहा है। संगठन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
  • मुंबई में प्रदर्शन: अक्टूबर की शुरुआत में CJP कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर मुंबई में विरोध प्रदर्शन किया था।
  • 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान: अगस्त में संगठन ने बेरोजगारी और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर युवाओं को जोड़ने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान 'क्या बोलती पब्लिक' की घोषणा की थी।

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