छत्तीसगढ़: दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालत में कथित तौर पर गलत तथ्य पेश करने और झूठे साक्ष्य गढ़ने के गंभीर आरोपों पर कड़ा कदम उठाते हुए छह अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद छत्तीसगढ़ के इंटेलिजेंस चीफ और 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी अमित कुमार समेत छह सीबीआई अधिकारियों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।
न्यायमूर्ति मधु जैन का अहम फैसला
न्यायमूर्ति मधु जैन ने 6 अक्टूबर 2026 को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि संबंधित दस्तावेज और विभागीय फाइलें प्रथम दृष्टया (Prima Facie) कानूनी कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती हैं। अदालत के निर्देशानुसार, यह शिकायत चार सप्ताह के भीतर सक्षम क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के पास भेजी जानी अनिवार्य है।
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जिन अधिकारियों के नाम शामिल हैं:
- आईपीएस अमित कुमार (घटनाक्रम के समय सीबीआई में डीआईजी)
- प्रेम कुमार गौतम
- विनीत विनायक
- रमन त्यागी
- सुशील दीवान
- मोहम्मद आजाद
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद पूर्व IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) की जांच से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस हाई-प्रोफाइल जांच के दौरान सीबीआई के जवाब के मूल मसौदे में अनधिकृत बदलाव (Unauthorized Alterations) किए गए और अदालत के समक्ष भ्रामक व गलत तथ्य रखे गए।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह कड़ा संदेश दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने या अदालत के समक्ष तथ्यों को छिपाने के प्रयासों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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