पाकिस्तान में इन दिनों सरकार और विपक्ष के बीच पारंपरिक सत्ता संघर्ष से हटकर एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि देश के नीतिगत और सामरिक फैसले वास्तव में ले कौन रहा है? सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बढ़ती शक्तियों के बीच दो ऐसे बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक भविष्य और नागरिक-सैन्य संतुलन पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

1. पाकिस्तान के चार बड़े राज्यों को छोटे हिस्सों में बांटने की योजना

'द इकोनॉमिस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेना प्रमुख आसिम मुनीर देश के चार प्रमुख प्रांतों—पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान—को छोटे प्रशासनिक हिस्सों में विभाजित करने के पक्ष में हैं।

  • क्या है योजना: इस प्रस्तावित योजना के तहत देश में 12 से 15 नए राज्य बनाने या लगभग 160 छोटी प्रशासनिक इकाइयां गठित करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
  • प्रशासनिक तर्क बनाम राजनीतिक प्रभाव: समर्थकों का तर्क है कि पंजाब (लगभग 12.8 करोड़ आबादी) और बलूचिस्तान जैसे विशाल क्षेत्रों में शासन चलाना और सेवाएं पहुंचाना कठिन है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। पंजाब में पीएमएल-एन (PML-N) और सिंध में पीपीपी (PPP) जैसी पार्टियों का मजबूत गढ़ है। प्रांतों के टूटने से इन दलों की क्षेत्रीय और केंद्रीय स्तर पर राजनीतिक ताकत कमजोर हो सकती है।

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2. सऊदी अरब में सैनिकों की तैनाती पर संसद की अनदेखी

दूसरा बड़ा विवाद सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती को लेकर है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के मद्देनजर पाकिस्तान ने वहां अतिरिक्त सैन्य बल भेजने पर सहमति जताई है।

  • बदला हुआ राजनीतिक परिदृश्य: साल 2015 में जब सऊदी अरब ने यमन संघर्ष के लिए सैन्य मदद मांगी थी, तब पाकिस्तानी संसद ने तटस्थ रहने का ऐतिहासिक फैसला लिया था और सेना ने उसका सम्मान किया था।
  • संसद की भूमिका नदारद: इस बार ताजा सैन्य तैनाती के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ या संसद से किसी प्रकार की अनुमति या मतदान की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि अब देश के सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मामलों में सेना का नियंत्रण सर्वोपरि हो चुका है।

आसिम मुनीर को कैसे मिली असीमित शक्तियां?

नवंबर 2025 में हुए व्यापक संवैधानिक संशोधनों के बाद जनरल आसिम मुनीर की स्थिति बेहद मजबूत हो चुकी है। उन्हें तीनों सेनाओं (थल, जल और वायु) की कमान से जुड़ी विशेष भूमिकाएं दी गईं, उनका कार्यकाल 2030 तक बढ़ाया गया, उन्हें 'फील्ड मार्शल' का पद आजीवन प्रदान किया गया और साथ ही आपराधिक मुकदमों से आजीवन कानूनी छूट भी दी गई। आलोचकों का मानना है कि इन बदलावों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसद की निगरानी क्षमताओं को बेहद कमजोर कर दिया है।

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