नई दिल्ली। भारत के प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों के समूह इंडी (INDI) गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक बुधवार, 30 सितंबर को राजधानी नई दिल्ली में आयोजित की गई। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोटर लिस्ट में हेरफेर के आरोपों को लेकर संयुक्त आंदोलन की कार्ययोजना तय करने के उद्देश्य से यह बैठक बुलाई गई थी। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत कई शीर्ष नेता शामिल हुए।
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खरगे ने रखीं 5 प्रमुख मांगें
प्रेस वार्ता और संबोधन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और जन-विश्वास बहाल करने के लिए पांच मुख्य मांगें सामने रखीं:
- बैलेट पेपर से चुनाव: EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की जगह पारंपरिक बैलेट वोटिंग (मतपत्र) व्यवस्था को पुनः लागू करना।
- पुरानी वोटर लिस्ट का उपयोग: भविष्य के चुनावों के लिए SIR प्रक्रिया लागू होने से पहले की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल किया जाए।
- प्रभावी अपील प्रक्रिया: वोटर लिस्ट से किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले एक पारदर्शी और प्रभावी अपील प्रणाली का होना।
- योग्य वोटरों का संरक्षण: प्रशासनिक खामियों या लापरवाही के चलते योग्य मतदाताओं के नाम कटने से बचाना।
- सरल वोटर रजिस्ट्रेशन: पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को बेहद आसान और सुलभ बनाना।
EVM और SIR प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
खरगे ने EVM पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि EVM का इस्तेमाल सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपनी राजनीतिक जरूरतों के अनुसार करती है। राहुल गांधी द्वारा महादेवपुरा, आलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में हेरफेर के सबूतों का हवाला देते हुए खरगे ने कहा कि विपक्ष की आपत्तियों को लगातार नजरअंदाज किया गया है।
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मीडिया रिपोर्ट से गरमाई राजनीति
विपक्ष का यह संयुक्त रुख एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र की हालिया रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार आधिकारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि SIR से जुड़े सभी निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से ही लिए गए थे।
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