नई दिल्ली:

आपात स्थिति या पैसों की तुरंत जरूरत होने पर 'इंस्टेंट लोन ऐप्स' (Instant Loan Apps) काफी सुविधाजनक लगते हैं। खासकर तब जब पारंपरिक बैंक कागजी कार्रवाई या प्रक्रिया में समय लगा रहे हों। हालांकि, सिर्फ लोन मिलने की रफ्तार देखकर जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में भारी पड़ सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिजिटल लेंडिंग दिशानिर्देशों के अनुसार, लोन स्वीकार करने से पहले उपभोक्ताओं को वित्तीय और डेटा सुरक्षा से जुड़ी कई बातों की जांच कर लेनी चाहिए:

1. असली लेंडर (बैंक/NBFC) की पहचान करें

ऐप पर दिखने वाला नाम अक्सर केवल एक 'लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर' (LSP) का हो सकता है।

  • नियम: लोन का लेनदेन हमेशा आपके और RBI द्वारा विनियमित बैंक या NBFC के बीच सीधे होना चाहिए, न कि किसी थर्ड-पार्टी पूल अकाउंट के जरिए।
  • सत्यापन: RBI ने 1 जुलाई, 2025 से एक पब्लिक डायरेक्टरी शुरू की है, जहां आप यह जांच सकते हैं कि कोई ऐप किसी मान्यता प्राप्त बैंक या NBFC से जुड़ा है या नहीं। यदि कोई ऐप लोन देने वाली संस्था का नाम छुपाता है या किसी व्यक्तिगत खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहता है, तो सतर्क रहें।

2. केवल विज्ञापित ब्याज दर न देखें, APR और चार्जेस जांचें

कम ब्याज दर का विज्ञापन देकर अक्सर अन्य छिपे हुए शुल्क (Hidden Charges) जोड़ दिए जाते हैं:

  • वार्षिक प्रतिशत दर (APR): लोन की असल लागत समझने के लिए Key Fact Statement (KFS) में दर्ज APR को देखें, जिसमें प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस और अन्य बंडल चार्जेस शामिल होते हैं।
  • प्राप्त रकम की तुलना करें: उदाहरण के लिए, यदि आप ₹50,000 का लोन ले रहे हैं, तो प्रोसेसिंग फीस कटने के बाद आपके बैंक खाते में वास्तव में कितनी रकम आ रही है और आपको कुल कितना रीपेमेंट करना है, इसका हिसाब लगाएं।
  • सुरक्षा: RBI के नियमों के अनुसार, KFS में जिन शुल्कों का उल्लेख नहीं किया गया है, लेंडर बाद में उन्हें आपसे वसूल नहीं कर सकता।

3. फोन की संवेदनशील परमीशन्स पर दें ध्यान

जल्दबाजी में सभी परमीशन्स 'Allow' कर देना आपकी निजता (Privacy) के लिए खतरनाक हो सकता है:

  • प्रतिबंधित परमीशन्स: RBI के फ्रेमवर्क के अनुसार, डिजिटल लेंडिंग ऐप्स आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉल लॉग, गैलरी या फाइलों का एक्सेस नहीं मांग सकते।
  • अनुमत परमीशन्स: केवल ऑनबोर्डिंग या KYC के लिए आपकी स्पष्ट सहमति से कैमरा, माइक्रोफोन या लोकेशन का केवल एक बार (One-time access) उपयोग किया जा सकता है।

4. 'एक्सेप्ट' पर क्लिक करने से पहले KFS ध्यान से पढ़ें

प्रमोशनल ऑफर्स या EMI कैलकुलेटर के बजाय 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS), सैंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें और उनकी एक कॉपी सेव करके रखें। इसमें निम्नलिखित जानकारियां स्पष्ट होनी चाहिए:

  • कुल लोन राशि और समयावधि (Tenure)
  • ब्याज दर और पेनल्टी चार्जेस (विलंब शुल्क)
  • रीपेमेंट शेड्यूल और रिकवरी का तरीका
  • कूलिंग-ऑफ पीरियड (Cooling-off Period): जिसमें आप बिना किसी भारी पेनाल्टी के लोन से बाहर निकल सकते हैं।

5. क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है सीधा असर

चाहे लोन की राशि कितनी भी छोटी हो या समयावधि कम हो, रेगुलेटेड संस्थाओं द्वारा दिए गए सभी डिजिटल लोन की जानकारी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CIBIL आदि) को दी जाती है। इसलिए, किसी भी लोन की EMI स्वीकार करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह आपकी मासिक आय और मौजूदा देनदारियों के अनुकूल है।