पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के बयान पर कांग्रेस का पलटवार; SIR और फॉर्म-6 में बदलावों को लेकर चुनाव आयोग में जारी मतभेदों के बीच बढ़ा सियासी घमासान।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी देशव्यापी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जुबानी जंग तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को 'पद्म भूषण' देने की वकालत करने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने तीखा तंज कसा है। खेड़ा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि "पद्म भूषण तो बहुत छोटी चीज है, उन्हें (ज्ञानेश कुमार को) प्रधानमंत्री ही बना देना चाहिए।"
इसे भी पढ़ेंः चुनावी साख पर संकट: आंतरिक असहमतियों और फॉर्म-6 विवाद के भंवर में निर्वाचन आयोग
समिक भट्टाचार्य का बयान और बीजेपी का दावा
शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के पानीहाटी में मीडिया से बातचीत करते हुए पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज की सराहना की थी।
- चुनावी पारदर्शिता का श्रेय: भट्टाचार्य ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में लोगों को बिना किसी डर के मतदान करने का अवसर मिला और चुनाव के दौरान हिंसा या हत्या की घटनाएं नहीं हुईं।
- वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण: उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के नवीनीकरण (SIR) के दौरान अवैध प्रवासियों के नाम सूची से हटाकर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किया, जिसके लिए उन्हें कम से कम पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना चाहिए।
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट और आयोग के भीतर मतभेद
पवन खेड़ा का यह पलटवार उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर गंभीर आंतरिक असहमतियों का दावा किया गया था। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार:
- 14 बार लिखित आपत्तियां: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
- फॉर्म-6 विवाद: नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म-6 के ऑनलाइन प्रारूप में अचानक एक नई शर्त जोड़ दी गई थी, जिसमें आवेदकों से उनके माता-पिता या पूर्वजों का पुराना SIR डेटा मांगा जा रहा था।
- सहमति का अभाव: दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को वैधानिक नियमों के विपरीत बताते हुए इस पर गहरी आपत्ति व्यक्त की थी और इसे हटाने की मांग की थी।
इसे भी पढ़ेंः उत्तराखंड के बागेश्वर में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 3.6 रही तीव्रता
आयोग का पक्ष
यद्यपि इन आंतरिक असहमतियों को लेकर विपक्ष हमलावर है, वहीं चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बहु-सदस्यीय संस्था में विभिन्न विषयों पर प्रशासनिक चर्चाएं और फीडबैक स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
फिलहाल, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, फॉर्म-6 की जटिलताओं और निष्पक्षता से जुड़े सवालों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।





