चंडीगढ़/अमृतसर।

पंजाब में किसानों का आंदोलन एक बार फिर उग्र रूप ले चुका है। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) और किसान मजदूर संघर्ष समिति (KMSS) के झंडे तले किसानों ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सहित कई पुरानी मांगों को लेकर राज्य के पांच प्रमुख जिलों—गुरदासपुर, अमृतसर, मोगा, फिरोजपुर और संगरूर—में रेलवे ट्रैक बाधित कर दिए। लगभग 15 सितंबर से शुरू हुई यह नाकेबंदी 17 सितंबर तक पूरी तीव्रता के साथ जारी रही, जिससे राज्य में रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

किसानों की मुख्य मांगें

आंदोलनकारी किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष मांगों की एक विस्तृत सूची रखी है:

  • एमएसपी की कानूनी गारंटी: बासमती चावल, सरसों, आलू, मूंग और मक्का जैसी फसलों के लिए एमएसपी का कानूनी अधिकार।
  • कर्ज राहत व भूमि पूलिंग नीति: किसानों और कृषि मजदूरों का पूर्ण कर्ज माफ किया जाए तथा बुनियादी ढांचे के नाम पर कृषि भूमि का अधिग्रहण करने वाली 'लैंड पूलिंग पॉलिसी' को रद्द किया जाए।
  • मुआवजा व मुकदमे वापसी: शंभू और खनौरी सीमा आंदोलनों में जान गंवाने वाले प्रदर्शनकारियों के परिजनों को सरकारी नौकरी व आर्थिक सहायता दी जाए और दर्ज आपराधिक मामले बिना शर्त वापस लिए जाएं।
  • पराली प्रबंधन व बीमा: गेहूं की बुवाई से पहले धान की पराली निपटाने के लिए व्यावहारिक विकल्प दिए जाएं और व्यापक फसल बीमा योजना लागू हो।

प्रशासनिक वार्ता और किसान संगठनों में विभाजन

किसान नेता जर्मनजीत सिंह बंडाला ने स्पष्ट किया कि जब तक पुरानी शिकायतों का स्थाई समाधान नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा। यद्यपि पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने धरना स्थलों पर पहुंचकर बातचीत की है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उल्लेखनीय है कि सितंबर की शुरुआत (1 से 7 सितंबर) में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 32 अन्य संगठनों ने मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना दिया था, जिसे राज्य सरकार द्वारा 22 फसलों पर एमएसपी गारंटी और कर्ज निपटान की प्रतिबद्धता जताने के बाद समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, उस समझौते के महज कुछ ही दिनों बाद दूसरे धड़े का यह नया रेल रोको आंदोलन दर्शाता है कि पंजाब का किसान आंदोलन कई गुटों में बंटा हुआ है और आगामी धान कटाई व गेहूं बुवाई के सीजन में राज्य को फिर बड़े प्रदर्शनों का सामना करना पड़ सकता है।