श्रीनगर:
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पूर्ण सफाए के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बीच सुरक्षा बलों को एक और बड़ी और निर्णायक सफलता हाथ लगी है। 'ऑपरेशन अशदर' के दौरान मारे गए खूंखार आतंकी की आधिकारिक पहचान यासिर के रूप में हुई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, ढेर किया गया आतंकी यासिर पड़ोसी देश पाकिस्तान का नागरिक था और पाकिस्तान प्रायोजित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था।
सोशल मीडिया पर पुलिस का सख्त संदेश
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करते हुए घाटी में सक्रिय आतंकियों को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। पुलिस ने अपनी पोस्ट में लिखा, "भाग सकते हो, लेकिन छिप नहीं सकते।" यह संदेश सुरक्षा बलों के उस संकल्प को दर्शाता है, जिसके तहत आतंकियों को ढूंढ-ढूंढकर समाप्त किया जा रहा है। इस विशेष पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल कार्यालय को भी टैग किया गया है।
पाकिस्तानी नागरिकता और लश्कर कनेक्शन की पुष्टि
ऑपरेशन के बाद अपनाई जाने वाली मानक पहचान प्रक्रिया के दौरान मारे गए आतंकी के पाकिस्तानी नागरिक होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार:
- विदेशी नेटवर्क का हिस्सा: यासिर घाटी में सक्रिय विदेशी आतंकियों के उस नेटवर्क से जुड़ा था, जो स्थानीय युवाओं को भड़काने और सीमा पार से मिलने वाले निर्देशों पर हिंसक वारदातों को अंजाम देने का काम करता था।
- लश्कर का रणनीतिक मोहरा: लश्कर-ए-तैयबा के इस सदस्य की मौजूदगी क्षेत्र में किसी बड़े हमले की साजिश की ओर इशारा कर रही थी, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।
आतंक विरोधी अभियानों में मील का पत्थर
'ऑपरेशन अशदर' के तहत यासिर को मार गिराया जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी और सामरिक सफलता माना जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में विदेशी आतंकियों की घुसपैठ को रोकने और उनके तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों को इस कार्रवाई से और बल मिलेगा। सुरक्षा बल अब क्षेत्र में सक्रिय अन्य संभावित विदेशी आतंकियों की पहचान कर उनके खिलाफ चौतरफा शिकंजा कस रहे हैं।





