अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड के $100 प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर $103.89 के करीब पहुँचने से भारतीय तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के मार्केटिंग मार्जिन पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
सितंबर में रिटेल बिक्री पर तगड़ा घाटा
कच्चे तेल के उच्च स्तर पर पहुँचने और खुदरा कीमतों में बदलाव न होने के कारण सितंबर महीने में ओएमसी (OMCs) को रिटेल बिक्री पर सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है:
- पेट्रोल पर घाटा: आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, सितंबर में पेट्रोल पर ₹7.4 प्रति लीटर तक का नुकसान संभव है।
- डीजल पर नुकसान: डीजल की बिक्री पर यह घाटा बढ़कर ₹10.3 प्रति लीटर तक पहुँचने का अनुमान है।
Q2 की बैलेंस शीट को संबल: जुलाई-अगस्त की कमाई
सितंबर के झटके के बावजूद, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) का ओवरऑल आंकड़ा पॉजिटिव रहने की उम्मीद है। जुलाई के शुरुआती हफ्तों में क्रूड गिरकर $69 प्रति बैरल के स्तर पर आया था, जिससे कंपनियों ने बेहतर मुनाफा दर्ज किया था।
- औसत तिमाही मुनाफा: Q2 में पेट्रोल पर औसतन ₹2.9 प्रति लीटर और डीजल पर ₹1.3 प्रति लीटर का शुद्ध लाभ होने का अनुमान है।
कंपनियों का असली 'ब्रह्मास्त्र': सिंगापुर GRM
मार्केटिंग घाटे के बावजूद तेल कंपनियों के कुल वित्तीय प्रदर्शन को सुरक्षित रखने में सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) सबसे बड़ी ढाल साबित हो रहा है:
| समयावधि / सूचकांकरिफाइनिंग मार्जिन (GRM)स्थिति / प्रभाव | ||
| अप्रैल–अगस्त औसत | $24.5 / बैरल | रिफाइनिंग से बम्पर कमाई (ऐतिहासिक स्तर) |
| ऐतिहासिक औसत (FY21-26) | $5.6 / बैरल | सामान्य स्तर की तुलना में 4 गुना से अधिक उछाल |
| Q1 (जून तिमाही) प्रदर्शन | पेट्रोल: -₹6.1/L, डीजल: -₹18.9/L घाटा | भारी वित्तीय नुकसान की स्थिति रही थी |
| Q2 (चालू तिमाही) अनुमान | ₹9 से ₹14 प्रति लीटर मार्जिन | जून तिमाही के मुकाबले जबरदस्त रिकवरी की उम्मीद |
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, रिफाइनिंग मार्जिन में आई इस तेजी के बल पर इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के लिए दूसरी तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए राहत भरे साबित हो सकते हैं।





