कर्नाटक में सूखे की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर रूप लेती जा रही है। बारिश की भारी कमी के कारण राज्य के 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है, जिससे कृषि क्षेत्र को ₹46,324.5 करोड़ से अधिक का भारी नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। संकट की इस घड़ी में राहत की राह तलाशने के लिए केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम ने प्रभावित जिलों का जमीनी सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।

47 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सूखे की मार से लगभग 47.09 लाख हेक्टेयर में लगी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। प्रभावित फसलों में तुअर, मक्का, कपास, गन्ना, सोयाबीन, मूंग, प्याज, सुपारी और लाल मिर्च जैसी मुख्य फसलें शामिल हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि मॉनसून खत्म होने तक प्रभावित तालुकों की संख्या 220 तक पहुंच सकती है।

राज्य ने मांगी ₹7,142 करोड़ की केंद्रीय सहायता

उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के तहत ₹7,142.64 करोड़ की तत्काल मदद की मांग की है। इसमें से:

  • ₹4,998.60 करोड़: इनपुट सब्सिडी के लिए
  • ₹2,144.04 करोड़: पशुओं के चारे और पेयजल व्यवस्था के लिए

उप मुख्यमंत्री ने राहत मानकों में संशोधन की मांग करते हुए जोर दिया कि किसानों को उनके वास्तविक नुकसान के अनुपात में और समय पर सहायता मिलनी चाहिए।

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4-दिवसीय दौरे पर 3 समूहों में बंटी केंद्रीय टीम

कृषि, सिंचाई, ग्रामीण विकास और पशुपालन जैसे विभिन्न विभागों के अधिकारियों को मिलाकर बनी केंद्रीय टीम 4 दिनों तक कर्नाटक के विभिन्न जिलों का दौरा करेगी। टीम को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है:

  1. पहला समूह: तुमकुरु, चित्रदुर्ग, दावणगेरे और विजयनगर
  2. दूसरा समूह: हासन, मैसूरु और चामराजनगर
  3. तीसरा समूह (उत्तर कर्नाटक): यादगीर, रायचूर, बागलकोट और कोप्पल

यह टीम खेतों में जाकर फसल नुकसान, पेयजल संकट और चारे की उपलब्धता का प्रत्यक्ष जायजा लेगी। केंद्रीय टीम की इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार राहत

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राशि जारी करने का निर्णय लेगी।

पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भी हालात चिंताजनक

कर्नाटक के अलावा महाराष्ट्र के लगभग दो-तिहाई हिस्से में भी सूखे का व्यापक असर देखा जा रहा है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, केंद्र सरकार दोनों राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। हालांकि कुल मॉनसून बारिश का घाटा घटकर 12% पर आया है, लेकिन दक्षिण कर्नाटक और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में खेतों पर सूखा साफ नजर आ रहा है। किसान संगठनों ने आगे की बुआई और जीवन-यापन के लिए जल्द से जल्द राहत राशि जारी करने की मांग की है।

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