कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

धर्मनगरी कुरुक्षेत्र रविवार को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन से भक्ति और लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठी। अपने हरियाणा दौरे के तहत राष्ट्रपति ने कुरुक्षेत्र में प्रदेश की छह दशकों की गौरवशाली विकास यात्रा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा। राष्ट्रपति ने अपने दिन की शुरुआत प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की और इसके पश्चात कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित हरियाणवी संस्कृति के प्रतिष्ठित महोत्सव 'रत्नावली' एवं गुरुकुल के कार्यक्रमों में शिरकत की।

मां भद्रकाली मंदिर में 105 किलो की घंटी बजाई, पंचामृत से किया अभिषेक

सुबह करीब 9 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कुरुक्षेत्र स्थित ऐतिहासिक श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर पहुंचीं। मंदिर परिसर में पीठाध्यक्ष पं. सतपाल शर्मा गुरुजी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। मंदिर के प्रवेश द्वार पर राष्ट्रपति ने 105 किलोग्राम वजनी विशाल घंटी बजाकर मंदिर परिसर में प्रवेश किया।

वैदिक परंपराओं के अनुसार राष्ट्रपति ने श्री देवीकूप में मां सती का पूजन किया और परिक्रमा के बाद मां के चरणों में चांदी के अश्व (घोड़े) समर्पित किए। गर्भगृह में स्वर्ण-रजत पोशाक से सुसज्जित मां भद्रकाली के दर्शन कर उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने मां के पवित्र चांदी के चरणों का पंचामृत से अभिषेक किया और भावपूर्वक आरती उतारी।

राष्ट्रपति का संदेश:
मंदिर समिति के सदस्यों से बातचीत और सामूहिक छायाचित्र (फोटो) खिंचवाने के दौरान राष्ट्रपति ने कहा, "आप सभी अत्यंत भाग्यशाली हैं जिन्हें मां के पवित्र चरणों में सेवा करने का पावन अवसर प्राप्त हुआ है।"

इस दौरान पीठाध्यक्ष ने राष्ट्रपति को माताओं को समर्पित मंदिर के 'महागौरव स्थल' के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

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'रत्नावली' महोत्सव: एक ही प्रांगण में सिमटी हरियाणा की लोक संस्कृति

मंदिर दर्शन के उपरांत राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (KU) पहुंचीं, जहां हरियाणा के 6 दशक के सफर को दर्शाते सांस्कृतिक महोत्सव 'रत्नावली' का भव्य शुभारंभ हुआ। परिसर में आयोजित सांस्कृतिक प्रदर्शनी और लोकनृत्यों के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक कला, खान-पान और धरोहर की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई।

महोत्सव को देखने के लिए दूर-दराज के गांवों से बुजुर्ग महिलाएं, ग्रामीण और विश्वविद्यालय के युवा छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में पहुंचे। रत्नावली महोत्सव ने एक ही मंच पर हरियाणा की हरियाणवी बोली, पारंपरिक परिधान, लोककला और छह दशकों के विकास पथ को जीवंत रूप में पेश किया। इसके अलावा राष्ट्रपति ने कुरुक्षेत्र स्थित प्रसिद्ध गुरुकुल के कार्यक्रम में भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री रहे साथ

राष्ट्रपति के इस गरिमामय कुरुक्षेत्र दौरे के दौरान हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पूरे समय उनके साथ मौजूद रहे। मंदिर परिसर और विश्वविद्यालय में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेंद्र वालिया, उपाध्यक्ष डॉ. एमके मौदगिल, डॉ. संजय शर्मा, स्नेहिल शर्मा, अन्नू पॉल, निकुंज शर्मा, मीना जोशी, सचिन गर्ग और पर्जन्य गौड़ समेत कई गणमान्य नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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