पूसू प्रतिनिधि,गिरिडीह।झारखंड की दो लोकसभा सीट लोहरदगा और गिरिडीह की स्थिति पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की टेढ़ी नजर जान पड़ती है।जहां चमरा लिंडा लोहरदगा में कांग्रेस और भाजपा के समीकरण को बिगाड़ने में लगे हैं।वहीं गिरिडीह में जयराम महतो,चंद्रप्रकाश चौधरी और मथुरा महतो के जीत पर उंगली उठायी जा रही है। इसको लेकर चमरा लिंडा और जयराम महतो लगातार रणनीतियां बनाने में लगे हुए हैं। जबकि चमरा लिंडा अभी भी जेएमएम में है, लेकिन कितने दिनों तक रहेगें इस सवाल का जवाब अभी किसी के पास नहीं है।
अगर चमरा लिंडा नाराज होकर लोहरदगा सीट से चुनाव लड़ते हैं तो वह सबसे बड़ी चुनौती जेएमएम-कांग्रेस के गठबंधन इंडिया के सामने ही खड़ा करेंगे। जेएमएम इस बात को भली भांति समझ रही है। इसलिए जेएमएम का आलाकमान चमरा लिंडा को लगातार मनाने में जुटा हुआ है,लेकिन इसमें अभी सफलता मिलती नहीं दिख रही है।
बताया जाता है कि चमरा लिंडा की क्षेत्र में अपनी अलग पहचान है। 2009 से वो बिशुनपुर के विधायक हैं। 2014 में वे समीर उरांव को विधानसभा में पटखनी दे चुके हैं। 2009 और 2024 में लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं और दोनों ही बार एक लाख से ज्यादा वोट लाएं हैं।हालांकि इस बार समीर उरांव जहां चमरा लिंडा और सुखदेव भगत को चुनौती नहीं मान रहे हैं, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव भगत भी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। इसलिए लोहरदगा में किसका पलड़ा भारी है ये अभी कोई नहीं कह सकता है।
कुछ यही स्थिति गिरिडीह की भी कही जा रही है।जहां पिछले दिनों पूर्व ऊर्जा मंत्री लाल चंद महतो का निधन हो गया।जिसे बहुजन सदान मोर्चा ने गिरिडीह से टिकट दिया था।इधर जयराम महतो को लेकर आजूस प्रमुख सुदेश महतो सार्वजनिक रुप से कह चुके हैं कि गिरिडीह की जनता जयराम महतो को समझ चुकी है और वह आजसू के साथ है। उन्हें भरोसा है कि जनता एक बार फिर आजसू प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी पर विश्वास जताएगी। दूसरी ओर जेएमएम के वरीय नेता मथुरा महतो 2004 के बाद एक बार फिर से गिरिडीह सीट जेएमएम की झोली में डालना चाहते हैं।ऐसे दावे किए जा रहे हैं।अब इसमें कितनी सत्यता है।यह रहस्य धीरे धीरे ही खुल पाएगा।
इस विषय पर गिरिडीह के बारे में कुछ लोगों का मानना है कि इस बार लोकसभा चुनाव में जयराम महतो गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के लिए बड़ा फैक्टर होंगे,लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जयराम का आगामी लोकसभा चुनाव के साथ ही पहली बार राजनीति में प्रवेश हो रहा है। यानि वास्तविकता यह है कि उनके सभी प्रतिद्वंदी पॉलिटिक्स के मझे हुए खिलाड़ी हैं,जो कभी भी पाशा पलट देने का मादा रखते हैं।दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने जयराम की सफलता अभी तक किसी भी मामले में देखी नहीं है।अब उनके लिए मतदाताओं के पिटारे में कुछ है भी या नहीं यह तो चार जून को ही पता चल पाएगा।





